पाठकों से निवेदन

इस ब्लोग पर तंत्र, मंत्र, ज्योतिष, वास्तु व अध्यातम के क्षेत्र की जानकारी निस्वार्थ भाव से मानव मात्र के कल्याण के उद्देश्य से दी जाती है तथा मैं कोई भी फीस या चन्दा स्वीकार नहीं करता हुं तथा न हीं दक्षिणा लेकर अनुष्ठान आदि करता हुं ब्लोग पर बताये सभी उपाय आप स्वंय करेगें तो ही लाभ होगा या आपका कोई निकट संबधी निस्वार्थ भाव से आपके लिये करे तो लाभ होगा।
साईं बाबा तथा रामकृष्ण परमहंस मेरे आदर्श है तथा ब्लोग लेखक सबका मालिक एक है के सिद्धान्त में दृढ़ विश्वास रखकर सभी धर्मों व सभी देवी देवताओं को मानता है।इसलिये इस ब्लोग पर सभी धर्मो में बताये गये उपाय दिये जाते हैं आप भी किसी भी देवी देवता को मानते हो उपाय जिस देवी देवता का बताया जावे उसको इसी भाव से करें कि जैसे पखां,बल्ब,फ्रिज अलग अलग कार्य करते हैं परन्तु सभी चलते बिजली की शक्ति से हैं इसी प्रकार इश्वर की शक्ति से संचालित किसी भी देवी देवता की भक्ति करना उसी शाश्वत निराकार उर्जा की भक्ति ही है।आपकी राय,सुझाव व प्रश्न सीधे mckaushik00@yahoo.co.in (read 00 as zero zero) पर मेल कीये जा सकते है।

Sunday, December 12, 2010

भूत देखने के लिये प्रयोग


आप भूत प्रेत नहीं मानते हो तों एक सरल सा प्रयोग मैं आपको बता देता हूं ताकि आप भूत जी के दर्शनों का लाभ उठा सकें यह प्रयोग मुझे एक तांत्रिक ने बताया था परन्तु मैने कभी करके नहीं देखा।
इसलिये इसकी सत्यता की गारन्टी मैं नहीं दे सकता पर करने वाले हिम्मती व जिज्ञासु व्यक्ति कमेंटस में अवश्य बतायें कि उन्हे भूत श्री के दर्शन हुये या नहीं।
घोड़े की ताजी लीद लेकर उसमें रूई लपेट कर बती बनायें तथा तिल के तेल में अन्धेरे स्थान में रात्रि 10 से 2 के बीच इसका दीपक जलाएं जंहा तक दीपक का प्रकाश जावेगा वहां तक विविध भुत प्रेत दिखायी देगें।
इनसे आपको वैसे तो कोई खतरा नहीं होगा क्यों की सुक्ष्म आत्माएं वैसे भी हमारे चारों तरफ रहती है परन्तु साधारण नेत्रों से दिखायी नहीं देती फिर भी आपका दिल कमजोर हुआ तथा कुछ हो गया तो लेखक की कोई जिम्मेदारी नहीं है यात्री अपनी जोखिम पर यात्रा करे।

Friday, August 27, 2010

सबसे बड़ी म्यूचूअल फंड स्कीम

मेरा मानना है कि म्यूचूअल फंड में निवेश करते समय ऐसी म्यूचूअल फंड योजना का चुनाव करना चाहिये जिसके पास सबसे ज्यादा धन हो इसकी वजह है कि एक तो आप ऐसी योजना में निवेश कर रहे हैं जिस पर देश के अधिकतम निवेशकों का भरोसा है दुसरा इनका पोर्टफोलियो ज्यादा डाईवर्सिफाईड होने से ज्यादा रिर्टन मिलते हैं वर्तमान में एच.डी.एफ.सी. टोप 200 योजना का कोरपस सबसे बड़ा करीबन 8000 करोड़ रूपये से उपर है।
SOURCE AND MORE DETAILS:- http://mutualfundgenius.blogspot.com/

Thursday, June 3, 2010

ब्रहम् मुहर्त में उठने से लाभ


अग्रेंजी में एक कहावत है कि “Early to bad and early to rise makes a man healthy wealthy and wise" हमारे धर्मग्रन्थों में भी इससे मिलती जुलती बातें कही गयी है। पदम पुराण में आता है कि सुर्योदय से पहले उठने से शरीर स्वस्थ व कमल के समान सुन्दर बनता है।
क्या आप इसे मानते हैं? मेरी इसमें स्पष्ट धारणा है कि सुबह सुर्योदय से 2 घन्टा पहले बिस्तर नहीं छोड़ने वालों को अपने जीवन में विकास की आशा नहीं करनी चाहिये।मैने अनेक प्रयोग व अनुभवों से इस कथन को सही पाया इसके निम्न कारण है।
1. प्रातः सुर्योदय से पूर्व प्रातः 4 से 6 के समय उठने वालों के शरीर में स्टीरायड का स्तर बढ़ जाता है। इसे विज्ञान भी मानती है। यह स्टीरायड प्राकृतिक होता है तथा शरीर का स्टेमिना ( साहस धैर्य सहनशीलता)बढ़ाता है।तथा अनेक रोग प्राकृतिक रूप से दुर करता है।
यही कारण है कि बाबा रामदेव के प्राणायाम से भी ज्यादा फायदा तभी मिलता है जब यह प्राणायाम प्रातः 4 से 6 बजे के बीच किये जाते हैं। आप इस अवधि में प्राणायाम न भी करें खाली ध्यान व पूजा कर सकते हैं या घूमने जा सकते हैं।
2. प्रातः 2 धन्टे जल्दी उठने से आप दुनिया से 2 घन्टे आगे हो जाते हैं जिससे इस कम्पीटीशन के युग में आप इन 2 घन्टों का सदुपयोग अपनी पढाई व अन्य कार्यों में कर सकते हैं।
3. 6 से 7 घन्टे प्रतिदिन सोने वालों में , 8 से 9 घन्टे प्रतिदिन सोने वालों में व 10 से 12 घन्टे प्रतिदिन सोने वालों में से मैने अनुभव किया है कि 6 से 7 घन्टे सोने वाले का मस्तिष्क ज्यादा उर्जावान व विशेष आध्यातमिकता से युक्त होता है।
हालांकि मैं स्वंय भी ब्रहम मुहर्त में नियमित रूप से नहीं उठ पाता हुं परन्तु शारिरीक स्वास्थ्य एंव आध्यातमिकता के लिहाज से ऐसा करना आवश्यक है। फिर भी जल्दी न उठ सकें तो कम से कम ऐसी आदत बनाने के प्रयास तो करते रहिये ।

Sunday, April 11, 2010

प्याज पर ब्याज




यदि आप धनवान होना चाहते हैं तो यह लेख अवश्य पढ़ना चाहिये। भारत में एक पंथ विशेष के लोग प्याज लहसुन आदि मूल (जड़) में उत्पन्न वस्तुएं नहीं खाते तथा इस पंथ ( जाति) के लोग धनवान भी खुब होते हैं।
इसके रहस्य को समझना आपको भी धनवान बनने में मदद कर सकता है। मान लिजिये आपके पास चार प्याज है तथा आपकी प्याज के पकौड़े व प्याज की कढ़ी खाने की इच्छा है तो आप क्या करेगें ?
आप इन प्याजों को काटकर प्याज के पकौड़े व कढ़ी बना लेगें। अब मैं आपसे पुछूं कि आप इन पकौड़ों व कढ़ी में प्याज नहीं डालते तो क्या फर्क पड़ता? आप झट से जबाब देगें कि अरे प्याज की खुश्बू से खाना स्वादिष्ट हो जाता है ।
अब इसका दुसरा तरीका भी आपके पास था वो ये कि आप इन चार प्याजों को गमले में उगा देते तथा इनके पतों को बारीक काट कर पकौड़ो व कढ़ी में डालते तो भी आपको वही फलेवर व स्वाद मिलता जो प्याज डालने पर आया था परन्तु इस विधि में आप हर 3 से 7 दिन में इन पतों को काट कर 4 प्याज का स्वाद जीवन भर ले सकते हैं।
बस यहि इस जाति की खासियत है ये जहां तक हो सके मूलधन को नहीं खाते मूलधन को ये लोग मूड़ी कहते हैं केवल मूल से उत्पन्न पते (ब्याज) खाकर जीवन भर काम चला लेते हैं। इसी जाति के एक व्यक्ति ने मुझे बताया कि यदि 10000 रूपये किसी को 2 रूपये सैंकड़ा ब्याज पर दिये जावें तथा ब्याज हर माह जोड़ा जावे तो 30 वर्ष में ये लगभग 1 करोड़ रूपये हो जाते हैं।
यदि आपके पुरखों ने 100 वर्ष पहले 15 प्रतिशत चक्रवृद्वि ब्याज से आपके नाम 1 रूपये की फिक्स डिपोजिट करवायी होती तो आज आपको उसके 10 लाख रूपये मिलते।
तो श्रीमान प्याज मत खाईये इसको उगाकर इसके पतों का ब्याज खाईये।

Saturday, March 27, 2010

क्या दही व लस्सी वास्तव में स्वास्थ्य वर्धक पेय है ?


आम तौर पर दही व लस्सी को शीतल प्रकृति का माना जाता है। परन्तु हकीकत कुछ और ही है यदि आप भी गर्मियों में अंधाधुध दही व लस्सी पी रहे हैं तो इस लेख को अवश्य पढ़िये।
आयुर्वेद के सबसे महान ग्रन्थ चरक सूत्र 27/225-226 में लिखा है कि दही भारी अभिष्यामंदी ( शरीर के स्त्रातों में रूकावट पैदा करने वाला) व गर्म प्रकृति का होता है। दही का पाचन होने पर लैक्टिक अम्ल बनता है जो आपकी एसिडीटी को बढ़ा देता है।
दही कब्ज करता है। यह बात आयुर्वेद के हर ग्रन्थ में लिखी है।
दही वायुकारक है व पितवर्धक है दही से बनी छाछ गले में कफ उत्पन्न करती है तथा दमा पीनस खांसी व गले के रोगों में अत्यंत हानिकारक होती है।
पंतजलि योगपीठ की वैध बालकृष्ण जी की पुस्तक आयुर्वेद्व सिद्वान्त रहस्य पेज 162 पर लिखा है कि दही ग्रीष्म बसन्त और शरद ऋतुओं में नहीं खाना चाहिये तो फिर कब खाना चाहिये? ये मैं बता देता हुं यदि जुकाम खांसी दमे से जल्दी उपर जाना हो तो वर्षा ऋतु में खाना चाहिये।
आपका प्यारा दही सूजन रक्त के रोग ज्वर रक्तपित व पीलीया रोग को उत्पन्न करता है ऐसा भी कुछ ग्रन्थों में लिखा है।
दही को रात्रि में खाना और भी ज्यादा खतरनाक व हानिकारक माना गया है।
अतः गर्मियों में आपको प्यास ज्यादा लगती है कब्ज रहती है जी भारी रहता है भुख कम लगती है व वायु के विकार रहते हैं पेट में जलन होती है तो केवल 3 दिन तक आपका दही व छाछ खाना बंद करके परिणाम देखिये व इस ब्लोग पर भी अपने कमेंटस से अवगत करवाईये कि दही छाछ ठंडे होते हैं या गर्म? इनको खाने से पेट ज्यादा ठीक रहता है या त्यागने पर ?

Saturday, January 23, 2010

पायरिया का सफल इलाज


पायरिया दातों में रहने वाले एक प्रकार के प्रोटोजोआ से होता है। कहते हैं कि एक बार पायरिया हो जावे तो जिदंगी भर ठीक नहीं होता । कैसी नादानी पूर्ण बात है कुछ कंपनिया तो महंगे दंत मंजन खाली पायरिया के नाम पर ही बेचती है जिनका करोड़ो रूपये का टर्न ओवर है परन्तु पायरिया ठीक नहीं होता।

मैं जो नुक्सा बताने जा रहा हुं वो हमारा परम्परागत नुक्सा है तथा सभी जानते हैं परन्तु उपयोग का तरीका सही नहीं आने से यह नुक्सा पायरिया ठीक कर सकता है कोई मानता नहीं है अतः मैं इसे वापस रीपीट कर देता हुं

चुटकी भर सादा नमक चुटकी भर हल्दी में चार पांच बुंद सरसों का तेल मिला कर उंगली से दांतों पर लगाकर 20 मिनट तक रखें लार आवे तो थुकते रहें लिजिये सर पायरिया एक ही दिन में ठीक हो जावेगा तथा ज्यादा ही पुराना है तो 3 दिन लगेगें व रोज करेंगें तो जिदंगी भर वापस नहीं होगा।

असल में इस सिंदात में 20 मिनट रूकने का ही चम्तकार है इसकी वजह है कि हमारे घरेलु नमक में किटाणुनाशक शक्ति है असल में नमक किटाणुओं के शरीर से पानी खेंच लेता है जिससे वो मर जाते हैं याद किजिए नमक डालने से अचार खराब नहीं होता तथा नमक के गरारे करने से गले का इन्फेक्शन ठीक हो जाता है इसी प्रकार नमक हल्दी व तेल 20 मिनट लगाकर रखने से पायरिया के प्रोटोजोआ ( अमीबा ) की सैल का पानी खत्म हो जाने से यह प्रोटोजोआ खत्म हो सकता है।

इसमें हल्दी पायरिया से मुहं में हुवे घावो को हील करती है तथा सरसों का तेल दांतों की परत पर नमक के अणुओं की रगड़ लगने से बचाता है तथा ज्यादा जोर से रगड़ना भी नहीं है केवल हल्के हाथ से लगाकर 20 मिनट बैठना है मुंह में थुक आवे तो थुक सकते हैं परन्तु थुकने पर थोड़ा मिश्रण वापस जरूर लगावें।

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भूत देखने के लिये प्रयोग

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