पाठकों से निवेदन

इस ब्लोग पर तंत्र, मंत्र, ज्योतिष, वास्तु व अध्यातम के क्षेत्र की जानकारी निस्वार्थ भाव से मानव मात्र के कल्याण के उद्देश्य से दी जाती है तथा मैं कोई भी फीस या चन्दा स्वीकार नहीं करता हुं तथा न हीं दक्षिणा लेकर अनुष्ठान आदि करता हुं ब्लोग पर बताये सभी उपाय आप स्वंय करेगें तो ही लाभ होगा या आपका कोई निकट संबधी निस्वार्थ भाव से आपके लिये करे तो लाभ होगा।
साईं बाबा तथा रामकृष्ण परमहंस मेरे आदर्श है तथा ब्लोग लेखक सबका मालिक एक है के सिद्धान्त में दृढ़ विश्वास रखकर सभी धर्मों व सभी देवी देवताओं को मानता है।इसलिये इस ब्लोग पर सभी धर्मो में बताये गये उपाय दिये जाते हैं आप भी किसी भी देवी देवता को मानते हो उपाय जिस देवी देवता का बताया जावे उसको इसी भाव से करें कि जैसे पखां,बल्ब,फ्रिज अलग अलग कार्य करते हैं परन्तु सभी चलते बिजली की शक्ति से हैं इसी प्रकार इश्वर की शक्ति से संचालित किसी भी देवी देवता की भक्ति करना उसी शाश्वत निराकार उर्जा की भक्ति ही है।आपकी राय,सुझाव व प्रश्न सीधे mahesh2073@yahoo.comपर मेल कीये जा सकते है।
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Saturday, July 2, 2011

केमिकल लोचा-सांई बाबा मुझसे बोले ???? पार्ट प्रथम


हाल ही में मैं मुसीबतों से बुरी तरह घिर गया मेरा ट्रांसफर 850 किमी दूर हो गया में बिलकूल भी परेशान नहीं हुआ क्यों कि मैं मेरे पुराने पदस्थापन स्थान से बोर हो गया था तथा कोई नया चैलेंज लेना चाहता था परन्तु नये स्थान पर जाने से पता चला कि वह पद तीन साल से रिक्त था तथा इससे पूर्व भी वहां कोई स्थायी पदस्थापन नहीं रहा था तथा यह भी बताया गया कि मेरी कुर्सी यहां बहुत ही अशुभ रही है एक टी.आर.ए के तो ज्वाईन करते ही दफतर की पुरानी कुसिर्यों की कील चुभ गयी जो कैंसर में तब्दील हो गयी जिससे वो छुटटी पर उतर गये तथा कुछ माह संर्घष करके परलोक सिघार गये।
एक टी.आर.ए साहब की आते ही दुर्घटना में टांग टूट गयी जिससे वो दो माह अवकाश पर रहे तीसरे का एक्सीडेंट हुआ जिससे वो चार माह अवकाश पर रहे तथा ट्रांसफर आदेश लेकर ही वापस लौटे।
दफतर के कुछ बदमिजाज चपरासी मुझसे उलझ पड़े बोले यहां जो आया है उसे जाना ही पड़ा है तो तुं किस खेत ही मूली है।(यह झूठ नहीं है वास्तव में ही तूं शब्द का प्रयोग किया गया था क्योंकि मेरी उम्र 37 वर्ष है पर में बच्चा सा लगता हूं तथा मेरे अलावा वहां सारे तीस मार खां ही थे तो उनका तूं कहना स्वभाविक था) दफतर के बाकी कर्मचारियों का हौसला भी बहुत बुलन्द था क्यों कि वो जानते थे की मेरी सीट पर कोई टी.आर.ए सुखी नहीं रहा है एक वास्तुविशेषज्ञ आए बोले कि आप अपनी सीट को यहां से बदल देवें तथा उन्होने मेरे पूरे दफतर में सभी अशुभ सीटों को बदल कर शुभ स्थानों पर करने की सलाह दे डाली में उनकी सलाह मानने को तैयार नहीं था क्यों कि मेरा विश्वास था जब मुझे यहां मेरे भगवान लेकर आये हैं तो मेरे लिये अच्छा ही होगा.....
परन्तु कुछ ही दिन बाद मेरे दस्त लग गये तथा मेरी सारी होशियारी फेल कर गये क्यों कि मैं जो भी देसी व अग्रेंजी दवा जानता था वो फेल हो गयी तथा मुझे अस्पताल में भर्ति होना पड़ा व छुटटी लेनी पड़ी।
कुछ  दिनों में स्वस्थ होकर वापस गया तो सारे समझदार वापस आये ओर मुझे मेरी बेवकूफी के लिये उलाहना देने लगे कि जब हमने पहले ही कहा था कि यहां आप नहीं रह सकते आज तक कोई नहीं रहा रहा तो काम नहीं कर सका ।पर मैने उनकी सलाहों को अनसूना कर दिया तथा यहां फाईलों के ढेर जिन पर पर धुल जमी हुयी थी में मिटटी झाड़ कर काम करने लगा तो मेरे कूल्हे पर बड़े बड़े फोड़े होने लगे तथा अब मुझे विश्वास हो गया कि यहां का श्राप बड़ा भंयकर है क्यों कि मेरी भक्ति भी फेल हो रही है अबके भी इन फोड़ों पर कोई दवा असर नहीं कर रही थी तथा भंयकर दर्द से में बैठ भी नहीं सकता था इसलिये फिर छुटटी लेनी पड़ी तो मैं घबरा गया तथा लगातार करणी माता व सांई बाबा को पुकारने लगा खूब चीख पुकार करके निराश होने पर एक दिन केमिकल लोचा मेरे दिमाग में हो गया सांई बाबा मुझसे बोले.......................क्या बोले पढिये अगले अंक में।
अगला भाग पढने के लिये निम्न लिंक पर जावें:-
केमिकल लोचा-सांई बाबा मुझसे बोले ???? पार्ट द्वितीय

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