पाठकों से निवेदन

इस ब्लोग पर तंत्र, मंत्र, ज्योतिष, वास्तु व अध्यातम के क्षेत्र की जानकारी निस्वार्थ भाव से मानव मात्र के कल्याण के उद्देश्य से दी जाती है तथा मैं कोई भी फीस या चन्दा स्वीकार नहीं करता हुं तथा न हीं दक्षिणा लेकर अनुष्ठान आदि करता हुं ब्लोग पर बताये सभी उपाय आप स्वंय करेगें तो ही लाभ होगा या आपका कोई निकट संबधी निस्वार्थ भाव से आपके लिये करे तो लाभ होगा।
साईं बाबा तथा रामकृष्ण परमहंस मेरे आदर्श है तथा ब्लोग लेखक सबका मालिक एक है के सिद्धान्त में दृढ़ विश्वास रखकर सभी धर्मों व सभी देवी देवताओं को मानता है।इसलिये इस ब्लोग पर सभी धर्मो में बताये गये उपाय दिये जाते हैं आप भी किसी भी देवी देवता को मानते हो उपाय जिस देवी देवता का बताया जावे उसको इसी भाव से करें कि जैसे पखां,बल्ब,फ्रिज अलग अलग कार्य करते हैं परन्तु सभी चलते बिजली की शक्ति से हैं इसी प्रकार इश्वर की शक्ति से संचालित किसी भी देवी देवता की भक्ति करना उसी शाश्वत निराकार उर्जा की भक्ति ही है।आपकी राय,सुझाव व प्रश्न सीधे mckaushik00@yahoo.co.in (read 00 as zero zero) पर मेल कीये जा सकते है।

Sunday, March 6, 2016

सम्पतिशाली बनने का देवी उपाय का दुर्लभ संयोग

श्री विश्वसार तन्त्र नामक ग्रन्थ में लिखा है कि भौमवती अमावस्या को आधी रात में जब चन्द्रमा शतभिषा नक्षत्र पर हो उस समय जो मनुष्य श्री दुर्गाष्टोतरशतनाम स्तोत्र (shri durgastotarshatnam stotra) को लिखकर उसका पाठ करता है, वो सम्पतिशाली होता है।
यही बात श्री गीताप्रेस गोरखपुर की दुर्गा सप्तशती के पेज १२ पर भी लिखी है। 
में बहुत सालों से इस मुहुर्त को ढूंढ रहा था। पर अमावस्या होती तो भौमवती अमावस्या नहीं होती थी। भौमवती अमावस्या होती तो चन्द्रमा शतभिषा नक्षत्र पर नहीं होता था। 
परन्तु  आज से लगभग 7 वर्ष पहले दिनांक 24.02.2009 मंगलवार को यह मर्हूत मुझे मिला था जब मैने स्वंय भी इसे लिखा था तथा अपने ब्लोग पर भी डाला था । 
सात वर्ष बाद यह फिर से सामने आया है कि अबके  दिनांक 08-03-2016 की जो अमावस्या है वो भौमवती अमावस्या है तथा चन्द्रमा भी शतभिषा नक्षत्र पर है।
आठ मार्च को मंगलवार है मंगलवार के दिन ही स्वामी विवेकानंद को माता जी के साथ साक्षात्कार हुआ था इस दिन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी भी है कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी भी दुर्गा सप्तशती के कीलक स्तोत्र में माता जी की कृपा प्राप्त करने की प्रमुख तिथी है इसी दिन खप्पर पूजा का योग भी है मुझे नहीं लगता ऐसा अमूल्य संयोग वापस आपको मिलेगा।
अतः इस दिन आधी रात में श्री दुर्गाष्टोतरशतनाम स्तोत्र को लिखकर उसका पाठ करें। 
इस दिन चन्द्रमा रात को 11.36 तक ही शतभिषा नक्षत्र पर है इसलिये लगभग रात को 11 बजे स्तोत्र लिखना प्रारंभ करें फिर उसका पाठ कर लेवें इसके बाद लिखे हुये स्तोत्र को लेमिनेशन करवा लेवें व हो सके तो रोज एक बार पाठ कर लेवें। 
लिखना व पाठ करना दोनो रात 11.36 तक पूर्ण करने हैं इसलिये यदि आप धीरे लिखते हैं तो उससे भी पहले लिखना प्रारंभ कर देवें।
बाद में रोज एक बार पाठ करने की आवश्यक शर्त नहीं है यह मैने बतायी है क्यों कि ऐसा लिखा है कि इस स्तोत्र का रोज पाठ करने वाला राज्यलक्ष्मी को प्राप्त कर लेता है राजा उसके दास हो जाते हैं तथा व अपार सम्पदा के साथ मोक्ष प्राप्त करता है इसलिये रोज एक बार पाठ कर लेना घाटे का सौदा नहीं है।।
यह स्तोत्र श्री गीताप्रेस गोरखपुर की दुर्गा सप्तशती के पेज ८-१२ पर दिया है या निम्न लिन्क से दुर्गा सप्तशती डाउनलोड कर लेवें।
कृपया ज्यादा से ज्यादा शेयर करके इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में सहभागी बने 
निवेदक
महेश चन्द्र कौशिक
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