पाठकों से निवेदन

इस ब्लोग पर तंत्र, मंत्र, ज्योतिष, वास्तु व अध्यातम के क्षेत्र की जानकारी निस्वार्थ भाव से मानव मात्र के कल्याण के उद्देश्य से दी जाती है तथा मैं कोई भी फीस या चन्दा स्वीकार नहीं करता हुं तथा न हीं दक्षिणा लेकर अनुष्ठान आदि करता हुं ब्लोग पर बताये सभी उपाय आप स्वंय करेगें तो ही लाभ होगा या आपका कोई निकट संबधी निस्वार्थ भाव से आपके लिये करे तो लाभ होगा।
साईं बाबा तथा रामकृष्ण परमहंस मेरे आदर्श है तथा ब्लोग लेखक सबका मालिक एक है के सिद्धान्त में दृढ़ विश्वास रखकर सभी धर्मों व सभी देवी देवताओं को मानता है।इसलिये इस ब्लोग पर सभी धर्मो में बताये गये उपाय दिये जाते हैं आप भी किसी भी देवी देवता को मानते हो उपाय जिस देवी देवता का बताया जावे उसको इसी भाव से करें कि जैसे पखां,बल्ब,फ्रिज अलग अलग कार्य करते हैं परन्तु सभी चलते बिजली की शक्ति से हैं इसी प्रकार इश्वर की शक्ति से संचालित किसी भी देवी देवता की भक्ति करना उसी शाश्वत निराकार उर्जा की भक्ति ही है।आपकी राय,सुझाव व प्रश्न सीधे mckaushik00@yahoo.co.in (read 00 as zero zero) पर मेल कीये जा सकते है।

Sunday, April 10, 2016

लाल किताब की सहायता से स्वयं जानिये अपना भविष्य पार्ट - 3 (प्रथम भाव लग्न में राहु होने का फलादेश)

प्रिय पाठको, यह इस सीरीज का तीसरा भाग है अतः यदि आप पहली बार इस ब्लोग पर आये है तो कृप्या इसे पहले भाग से पढना प्रारभं करे पहले दो भागो के लिकं निचे दिये जा रहे है - 
1. लाल किताब से ज्योतिष सीखें ( इस सीरीज का भाग-1 ) 
2. लाल किताब के अनुसार प्रथम भाग में गुरू का फलादेश ( इस सीरीज का भाग- 2 ) 
उक्त प्रथम भाग पर आये कमेंटो के वरियता क्रम में सबसे पहले हमने लग्न ( प्रथम भाव ) में गुरू होने का फल पढा था अब प्रथम भाव में राहु हो तो क्या फलादेश होता है इस आलेख में जानेगें । 
 लाल किताब के अनुसार प्रथम भाव ( लग्न ) में राहु होने का फलादेश - 
 जैसा कि हमनें पूर्व में लिखा था लाल किताब एक वैज्ञानिक विधा है इसमें केवल जन्म पत्रिका ही नहीं आपके सबधिंत ग्रह का फलादेश लागु होगा या नही इसके सकेंत भी दिये हैं जैसे आपके पितृ ऋण का योग है परन्तु आपके स्वयं के या  पैतृक घर के सामने या बायी तरफ 20 से 50 कदम दूरी पर मदिंर या पीपल का वृक्ष नही है तो समझें की आपकी जन्म पत्रिका दुरस्त नही है व आपके पितृ ऋण नहीं है। इस प्रकार लग्न में राहु होने की जाॅच करें - 
1.
इस चित्र के अनुसार आपकी अनामिका उगंली के नीचे राहु का वर्गाकार लाईनों वाला निशान होना चाहिये ( पुरूष दांया हाथ स्त्री बांया हाथ देखे ) 
2. लग्न में राहु वाले के जन्म के समय सख्त वर्षा, आंधी तुफान आये होग, उसके जन्म के समय नाना-नानी दोनो ही जीवित होगे । 
3. लग्न में राहु वाले के पैतृक घर के सामने वाले घर में सतांन नही होगी वह घर वीरान होगा । 
 लग्न में राहु वाला जातक धनवान होता है तथाअपने शरीर पर व परिवार पर ज्यादा खर्च करता है । प्रथम भाव में राहु व सातवें भाव में शुक्र हो तो जातक खूब धनवान होता है परन्तु उसकी पत्नी का या पति का स्वास्थ्य खराब रहता है । 
उपाय - 
 1. मरीज के वजन के बराबर जौ चलते पानी में बहा देवे या जौ रात्रि को मरीज के सिरहाने रखकर सुबह जानवरों को खिलादेवे । 
 2. सफाई कर्मचारी को पैसों का दान या मसूर की बगैर छिलके वाली लाल दाल का दान देवे । 
लग्न में ( प्रथम भाव में ) राहु वाले जातक की शादि के समय दहेज में इलैक्ट्रोनिक सामान दिया जावे तो कोई परेशानी नहीं हैं मगर शादि के बाद ऐसा जातक अपने ससुराल या मायके से इलैक्ट्रोनिक आईटम लावे तो उसका सूर्य कमजोर हो जाता है तथा विभिन्न प्रकार की मुसीबतें, लडाई-झगडे जातक को घेर लेते है । 
 प्रथम भाव में राहु व सूर्य 9 वें भाव में हो या सूर्य दुसरे खाने में हो तो जातक धर्म विरूद्, पूजा पाठ से घृणा करने वाला, ससुराल व धर्म स्थानों का अपमान करने वाला होगा । 
 प्रथम भाव में राहु होने पर सूर्य जिस स्थान में बेठा होता है उसके अनुसार फल होता है जो निम्न प्रकार से है ः
 1. राहु प्रथम स्थान में व सूर्य भी प्रथम स्थान हो तो जातक सरकारी नौकरी में होता है परन्तु उसकी सरकारी सेवा में बेबुनियाद वहम से कोई न कोई परेशानी खडी रहती है । 
 उपाय ः- अपने वजन के बराबर कच्चे  चावल को चलती नदी में बहा देवे तो सरकारी सेवा की परेशानी दूर होती है । 
2. राहु प्रथम भाव में व सूर्य 8 वें भाव में हो तो बिना कारण खर्च, फितुलखर्च आदि से जातक पीडीत रहता है । 
उपाय  :-सूर्य की वस्तुओं ( मसूर की दाल, गुड, ताबां ) आदि का दान करें ।  बिल्ली की जेर भूरे कपड़े में बाॅध कर घर में रखे । 
 लग्न में राहु वाले की मानसिक शांति भगं हो रही हो तो चांदि की अगुंठी सबसे  छोटी उगंली में धारण करे ,दूध का दान करे , सूर्य को जल अपर्ण करे तो दिमाग की अशांति दूर होती है । 
सरकारी सेवा में हो तो बगैर प्रमोशन के बार-बार तबादले भी होते हैं । 
यदि मंगल 12 वें खाने में हो तो राहु ग्रह का कोई भी फल नही होता चाहे वो किसी खाने में क्यों न हो ।
अगले भाग में लग्न में शनि होने पर क्या फलादेश होता है उस पर प्रकाश डाला जावेगा आपके प्रथम भाव में जो ग्रह हो उसे कृपया कमेंट में लिखें ताकि आगामी भागों में उन पर प्रकाश डाला जा सके।
lal kitab astrology rahu in first house hindi

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