पाठकों से निवेदन

इस ब्लोग पर तंत्र, मंत्र, ज्योतिष, वास्तु व अध्यातम के क्षेत्र की जानकारी निस्वार्थ भाव से मानव मात्र के कल्याण के उद्देश्य से दी जाती है तथा मैं कोई भी फीस या चन्दा स्वीकार नहीं करता हुं तथा न हीं दक्षिणा लेकर अनुष्ठान आदि करता हुं ब्लोग पर बताये सभी उपाय आप स्वंय करेगें तो ही लाभ होगा या आपका कोई निकट संबधी निस्वार्थ भाव से आपके लिये करे तो लाभ होगा।
साईं बाबा तथा रामकृष्ण परमहंस मेरे आदर्श है तथा ब्लोग लेखक सबका मालिक एक है के सिद्धान्त में दृढ़ विश्वास रखकर सभी धर्मों व सभी देवी देवताओं को मानता है।इसलिये इस ब्लोग पर सभी धर्मो में बताये गये उपाय दिये जाते हैं आप भी किसी भी देवी देवता को मानते हो उपाय जिस देवी देवता का बताया जावे उसको इसी भाव से करें कि जैसे पखां,बल्ब,फ्रिज अलग अलग कार्य करते हैं परन्तु सभी चलते बिजली की शक्ति से हैं इसी प्रकार इश्वर की शक्ति से संचालित किसी भी देवी देवता की भक्ति करना उसी शाश्वत निराकार उर्जा की भक्ति ही है।आपकी राय,सुझाव व प्रश्न सीधे mahesh2073@yahoo.comपर मेल कीये जा सकते है।

Sunday, April 3, 2011

चैत्र नवरात्री में श्री देव्यथर्वशीर्ष की प्रभावकारी साधना



सर्वप्रथम अपने पाठकों से इस लेख को लिखने में हुये विलम्ब के लिये क्षमा चाहता हुं क्यों कि आज से चैत्र नवरात्रा प्रारंभ हो चुके हैं तथा सभंव है जब तक मेरे कुछ पाठक इस ब्लोग को पढ पावें तब तक दुसरा या तीसरा नवरात्रा आ जावे खैर उनके लिये भी मैं उपाय बताउंगा जो इस साधना को प्रथम नवरात्रा से नहीं कर सकेगें।
श्री देव्यथर्वशीर्ष को अथर्ववेद से लिया गया है अथर्ववेद में इसकी बड़ी भारी महिमा बतायी


गयी है इसके जाप से देवी की कृपा इतनी शीघ्र प्राप्त होती है कि साधक आश्चर्यचकित हो उठता है।
इस देव्यथर्वशीर्ष के जाप से पांचों अथर्वशीर्ष के जाप का फल मिलता है असल में वेदों में हिन्दुओं के पांच प्रमुख देवता माने गये हैं गणेश , दुर्गा , शिव , सुर्य व विष्णु अतः इन पांचों देवताओं के अलग अलग अथर्वशीर्ष बताये गये हैं परन्तु देवी के अथर्वशीर्ष के जाप से इन पांचों का फल प्राप्त होता है।
इसका सांयकाल में अध्ययन करने से दिन भर किये हुये पापों से मनुष्य मुक्त हो जाता है तथा दिन में अध्ययन करने से रात्रि में किये हुये पापों से मुक्त हो जाता है। असल में गीता में कहा गया है कि जैसे अग्नि में धुआं रहता है वैसे सभी कर्मों में पाप रहता है आप सड़क पर चलते हैं तो भी छोटे जीव जन्तु जाने अनजाने में आपसे दबकर मरते रहते हैं नौकरी करते हैं तो भी जाने अनजाने में दुसरों की निन्दा झूठ बोलना आदि कर्म परवश हो जाते हैं इनके कारण संचित हुआ पाप ही सभी दुखों का मूल है जिसके बीज चाहे इस जाप से नष्ट हो जाते हैं यहि इसका तात्पर्य है।
इसका दस बार जाप करने से मनुष्य इस जन्म के संचित कर्मों से मुक्त हो जाता है तथा 108 बार जाप करने से पिछले सभी जन्मों के संचित बीज जल जाते है।
स इसका ही सरल सा अनुष्टान करना है मैं ज्यादा जटिलता से पूजा करना नहीं बताता बस माता की प्रतिमा के आगे देसी घी का दीपक लगाएं घूप लगाएं तथा इस लिन्क से गीताप्रेष गोरखपुर की मूल दुर्गासप्तशती डाउनलोड कर लेवें इसमें पेज सं 44 पर श्री देव्यथर्वशीर्ष दिया है
जिसका हिन्दी अर्थ पहले पढ़ कर समझ लेवें कि आप देवी की किस रूप में उपासना करने जा रहें है इसके पश्चात पाठ संस्कृत में ही करना है उच्चारण गलत करने से भी कोई दोष नहीं है क्यों कि आपको छ बार सुबह व छ बार शाम को कुल बारह पाठ प्रतिदिन के हिसाब से कुल 108 पाठ इन नवरात्रा में करने हैं जो लोग इस लेख को विलम्ब से पढ रहें हैं वे उस हिसाब से संख्या बढ़ा लेवें कि 9 दिन में 108 पाठ पुरे हो जावें।
इसलिये जब तक आपके 108 पाठ पुरे होगें तब तक माता की कृपा से आपका उच्चारण अपने आप शुद्व हो जावेगा आपका पहला पाठ अनाड़ी संस्कृत ज्ञानी की तरह होगा परन्तु 108 वां पाठ पंडित की तरह होगा प्रयास करके देखिए यह पहला चम्तकार है।
इस उपासना के दौरान जो स्वप्न या प्रत्यक्ष अनुभव हों वे किसी को नहीं बता सकते परन्तु पति पत्नी आपस में बता सकते हैं उसकी मनाही नहीं है। हमारे कमेंटस में इतना जरूर बता देवें कि आपने यह उपासना की तो आपको लाभ हुआ या व्यर्थ गयी।

Saturday, January 22, 2011

रजनी की यादें

मैं कवि नहीं हुं तथा कविताएं नहीं लिखता परन्तु आज पुराने कागजों की सफाई करते समय एक कागज पर मैरे द्वारा 20 वर्ष पूर्व अपनी एक सहपाठी को देखकर लिखि गयी कविता याद मिल गयी।
मुझे अपनी उस सहपाठी से एकतरफा आकषर्ण था तब मैं 11 वीं कक्षा का विधार्थि था तथा गर्मियों की छुटिट्यां हो जाने से वो एकतरफा आकषर्ण ज्यादा जोर मारने लगा तब शायद ये कविता मैने लिखि होगी क्यों कि इस पर 05.05.1991 की दिनांक अकिंत है।
यहां मैं फिर उल्लेख कर दुं कि प्यार व्यार कुछ नहीं था शायद विपरित लिंग के प्रति मेरा एकतरफा आकर्षण था क्यों कि मैं अपनी भावनांए कभी भी व्यक्त नहीं कर पाता था तथा डर भी लगता था। आज वो कागज 20 वर्ष बाद वापस सामने आया तो सोचा मेरे ब्लोग पर डाल दुं क्या पता दुनिया के किसी कोने से वो सहपाठी इसे पढ ले तथा उस वक्त की मेरी भावना ( या बदनियति ) से आज अवगत हो जावे।
ये रही वो चंद लाईनेः-
पवित्र पावन सूरत जब देखी तुम्हारी
फिकी पड़ गयी क्षण भर में दुनिया सारी
कहते है मित्र छलावा है यह
जवानी के जाल का भुलावा है यह
पर तुम्हारी काली आखें कजरारी
होंठ जैसे गुलाब की क्यारी
इनको कैसे भुल सकता है कोई
तुम्हारे बिना कैसे जी सकता है कोई
रजनी अमर रहेगी यादें तुम्हारी
फिकी पड़ गयी क्षण भर में दुनिया सारी
आज मैं शादिशुदा हुं तथा 3 बच्चों का पिता हुं परन्तु अभी भी उतना ही डरता हुं इसलिये यह वैधानिक चेतावनी लिख देता हुं कि इस आलेख के सभी तथ्य काल्पनिक है तथा इनका वास्तविक घटनाओं से कोई संबंध नहीं है इसलिये वास्तविक घटनाओं से किसी भी मिलान को संयोग मात्र समझा जावे।

Sunday, December 12, 2010

भूत देखने के लिये प्रयोग


आप भूत प्रेत नहीं मानते हो तों एक सरल सा प्रयोग मैं आपको बता देता हूं ताकि आप भूत जी के दर्शनों का लाभ उठा सकें यह प्रयोग मुझे एक तांत्रिक ने बताया था परन्तु मैने कभी करके नहीं देखा।
इसलिये इसकी सत्यता की गारन्टी मैं नहीं दे सकता पर करने वाले हिम्मती व जिज्ञासु व्यक्ति कमेंटस में अवश्य बतायें कि उन्हे भूत श्री के दर्शन हुये या नहीं।
घोड़े की ताजी लीद लेकर उसमें रूई लपेट कर बती बनायें तथा तिल के तेल में अन्धेरे स्थान में रात्रि 10 से 2 के बीच इसका दीपक जलाएं जंहा तक दीपक का प्रकाश जावेगा वहां तक विविध भुत प्रेत दिखायी देगें।
इनसे आपको वैसे तो कोई खतरा नहीं होगा क्यों की सुक्ष्म आत्माएं वैसे भी हमारे चारों तरफ रहती है परन्तु साधारण नेत्रों से दिखायी नहीं देती फिर भी आपका दिल कमजोर हुआ तथा कुछ हो गया तो लेखक की कोई जिम्मेदारी नहीं है यात्री अपनी जोखिम पर यात्रा करे।

Friday, August 27, 2010

सबसे बड़ी म्यूचूअल फंड स्कीम

मेरा मानना है कि म्यूचूअल फंड में निवेश करते समय ऐसी म्यूचूअल फंड योजना का चुनाव करना चाहिये जिसके पास सबसे ज्यादा धन हो इसकी वजह है कि एक तो आप ऐसी योजना में निवेश कर रहे हैं जिस पर देश के अधिकतम निवेशकों का भरोसा है दुसरा इनका पोर्टफोलियो ज्यादा डाईवर्सिफाईड होने से ज्यादा रिर्टन मिलते हैं वर्तमान में एच.डी.एफ.सी. टोप 200 योजना का कोरपस सबसे बड़ा करीबन 8000 करोड़ रूपये से उपर है।
SOURCE AND MORE DETAILS:- http://mutualfundgenius.blogspot.com/

Thursday, June 3, 2010

ब्रहम् मुहर्त में उठने से लाभ


अग्रेंजी में एक कहावत है कि “Early to bad and early to rise makes a man healthy wealthy and wise" हमारे धर्मग्रन्थों में भी इससे मिलती जुलती बातें कही गयी है। पदम पुराण में आता है कि सुर्योदय से पहले उठने से शरीर स्वस्थ व कमल के समान सुन्दर बनता है।
क्या आप इसे मानते हैं? मेरी इसमें स्पष्ट धारणा है कि सुबह सुर्योदय से 2 घन्टा पहले बिस्तर नहीं छोड़ने वालों को अपने जीवन में विकास की आशा नहीं करनी चाहिये।मैने अनेक प्रयोग व अनुभवों से इस कथन को सही पाया इसके निम्न कारण है।
1. प्रातः सुर्योदय से पूर्व प्रातः 4 से 6 के समय उठने वालों के शरीर में स्टीरायड का स्तर बढ़ जाता है। इसे विज्ञान भी मानती है। यह स्टीरायड प्राकृतिक होता है तथा शरीर का स्टेमिना ( साहस धैर्य सहनशीलता)बढ़ाता है।तथा अनेक रोग प्राकृतिक रूप से दुर करता है।
यही कारण है कि बाबा रामदेव के प्राणायाम से भी ज्यादा फायदा तभी मिलता है जब यह प्राणायाम प्रातः 4 से 6 बजे के बीच किये जाते हैं। आप इस अवधि में प्राणायाम न भी करें खाली ध्यान व पूजा कर सकते हैं या घूमने जा सकते हैं।
2. प्रातः 2 धन्टे जल्दी उठने से आप दुनिया से 2 घन्टे आगे हो जाते हैं जिससे इस कम्पीटीशन के युग में आप इन 2 घन्टों का सदुपयोग अपनी पढाई व अन्य कार्यों में कर सकते हैं।
3. 6 से 7 घन्टे प्रतिदिन सोने वालों में , 8 से 9 घन्टे प्रतिदिन सोने वालों में व 10 से 12 घन्टे प्रतिदिन सोने वालों में से मैने अनुभव किया है कि 6 से 7 घन्टे सोने वाले का मस्तिष्क ज्यादा उर्जावान व विशेष आध्यातमिकता से युक्त होता है।
हालांकि मैं स्वंय भी ब्रहम मुहर्त में नियमित रूप से नहीं उठ पाता हुं परन्तु शारिरीक स्वास्थ्य एंव आध्यातमिकता के लिहाज से ऐसा करना आवश्यक है। फिर भी जल्दी न उठ सकें तो कम से कम ऐसी आदत बनाने के प्रयास तो करते रहिये ।

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भूत देखने के लिये प्रयोग

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