पाठकों से निवेदन

इस ब्लोग पर तंत्र, मंत्र, ज्योतिष, वास्तु व अध्यातम के क्षेत्र की जानकारी निस्वार्थ भाव से मानव मात्र के कल्याण के उद्देश्य से दी जाती है तथा मैं कोई भी फीस या चन्दा स्वीकार नहीं करता हुं तथा न हीं दक्षिणा लेकर अनुष्ठान आदि करता हुं ब्लोग पर बताये सभी उपाय आप स्वंय करेगें तो ही लाभ होगा या आपका कोई निकट संबधी निस्वार्थ भाव से आपके लिये करे तो लाभ होगा।
साईं बाबा तथा रामकृष्ण परमहंस मेरे आदर्श है तथा ब्लोग लेखक सबका मालिक एक है के सिद्धान्त में दृढ़ विश्वास रखकर सभी धर्मों व सभी देवी देवताओं को मानता है।इसलिये इस ब्लोग पर सभी धर्मो में बताये गये उपाय दिये जाते हैं आप भी किसी भी देवी देवता को मानते हो उपाय जिस देवी देवता का बताया जावे उसको इसी भाव से करें कि जैसे पखां,बल्ब,फ्रिज अलग अलग कार्य करते हैं परन्तु सभी चलते बिजली की शक्ति से हैं इसी प्रकार इश्वर की शक्ति से संचालित किसी भी देवी देवता की भक्ति करना उसी शाश्वत निराकार उर्जा की भक्ति ही है।आपकी राय,सुझाव व प्रश्न सीधे mahesh2073@yahoo.comपर मेल कीये जा सकते है।

Sunday, March 6, 2016

सम्पतिशाली बनने का देवी उपाय का दुर्लभ संयोग

श्री विश्वसार तन्त्र नामक ग्रन्थ में लिखा है कि भौमवती अमावस्या को आधी रात में जब चन्द्रमा शतभिषा नक्षत्र पर हो उस समय जो मनुष्य श्री दुर्गाष्टोतरशतनाम स्तोत्र (shri durgastotarshatnam stotra) को लिखकर उसका पाठ करता है, वो सम्पतिशाली होता है।
यही बात श्री गीताप्रेस गोरखपुर की दुर्गा सप्तशती के पेज १२ पर भी लिखी है। 
में बहुत सालों से इस मुहुर्त को ढूंढ रहा था। पर अमावस्या होती तो भौमवती अमावस्या नहीं होती थी। भौमवती अमावस्या होती तो चन्द्रमा शतभिषा नक्षत्र पर नहीं होता था। 
परन्तु  आज से लगभग 7 वर्ष पहले दिनांक 24.02.2009 मंगलवार को यह मर्हूत मुझे मिला था जब मैने स्वंय भी इसे लिखा था तथा अपने ब्लोग पर भी डाला था । 
सात वर्ष बाद यह फिर से सामने आया है कि अबके  दिनांक 08-03-2016 की जो अमावस्या है वो भौमवती अमावस्या है तथा चन्द्रमा भी शतभिषा नक्षत्र पर है।
आठ मार्च को मंगलवार है मंगलवार के दिन ही स्वामी विवेकानंद को माता जी के साथ साक्षात्कार हुआ था इस दिन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी भी है कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी भी दुर्गा सप्तशती के कीलक स्तोत्र में माता जी की कृपा प्राप्त करने की प्रमुख तिथी है इसी दिन खप्पर पूजा का योग भी है मुझे नहीं लगता ऐसा अमूल्य संयोग वापस आपको मिलेगा।
अतः इस दिन आधी रात में श्री दुर्गाष्टोतरशतनाम स्तोत्र को लिखकर उसका पाठ करें। 
इस दिन चन्द्रमा रात को 11.36 तक ही शतभिषा नक्षत्र पर है इसलिये लगभग रात को 11 बजे स्तोत्र लिखना प्रारंभ करें फिर उसका पाठ कर लेवें इसके बाद लिखे हुये स्तोत्र को लेमिनेशन करवा लेवें व हो सके तो रोज एक बार पाठ कर लेवें। 
लिखना व पाठ करना दोनो रात 11.36 तक पूर्ण करने हैं इसलिये यदि आप धीरे लिखते हैं तो उससे भी पहले लिखना प्रारंभ कर देवें।
बाद में रोज एक बार पाठ करने की आवश्यक शर्त नहीं है यह मैने बतायी है क्यों कि ऐसा लिखा है कि इस स्तोत्र का रोज पाठ करने वाला राज्यलक्ष्मी को प्राप्त कर लेता है राजा उसके दास हो जाते हैं तथा व अपार सम्पदा के साथ मोक्ष प्राप्त करता है इसलिये रोज एक बार पाठ कर लेना घाटे का सौदा नहीं है।।
यह स्तोत्र श्री गीताप्रेस गोरखपुर की दुर्गा सप्तशती के पेज ८-१२ पर दिया है या निम्न लिन्क से दुर्गा सप्तशती डाउनलोड कर लेवें।
कृपया ज्यादा से ज्यादा शेयर करके इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में सहभागी बने 
निवेदक
महेश चन्द्र कौशिक
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Wednesday, February 10, 2016

लाल किताब की सहायता से स्वंय जानिये अपना भविष्य भाग-2 ( प्रथम भाव में गुरू ) Learn Lal Kitab Astrology Hindi Part 2 Guru in First House

 इस आलोख को पढने से पूर्व यह निवेदन है कि आप इसको शुरू से ( भाग-1 से) पढें । इस आलेख का प्रथम भाग पढने के लिये यहाॅ क्लिक करे -
उक्त पूर्व आलेख पर सर्वप्रथम टिप्पणी श्री पवन गुप्ता जी की प्राप्त हुयी है जिनके जन्म कुण्डली के प्रथम भाव में गुरू स्थित है तो आज हम जानते है कि लाल किताब के अनुसार प्रथम भाव में गुरू स्थित होने का क्या फलादेश है। 
हस्तरेखा -
लाल किताब इतने वैज्ञानिक तरीके पर आधारित है कि इसमें जन्म कुण्डली के अनुसार आपकी हस्तरेखाए भी बतायी गयी है ।यदि आप पुरूष है तो अपना दांया हाथ व यदि आप स्त्री है तो अपना बांया हाथ देखे यहां पर जो चित्र दिया जा रहा है उसमे तीन निशान दिये गये हैं एक कनिष्ठा अंगुली व अनामिका अंगुली के लगभग मध्य में (ज्यादा अनामिका उंगली की तरफ ) अग्रेजी अक्षर Y जैसा निशान हैं ।दुसरा अग्रेंजी अक्षर U जैसा निशान है जो कनिष्ठा उंगली के लगभग नीचे होता है ।
 तीसरा तर्जनी अंगली के नीचे से जो लम्बी रेखा जाती है वो कलाई के पास तीर की तरह दो शाखाओं में फट जाती है यदि आपकी कुण्डली सही है तो इन तीनो निशानो में से कम से कम एक या दो या तीनो ही आपकी हथेली में हैं तो ही लाल किताब के अनुसार आपकी लग्न कुण्डली में प्रथम स्थान में गुरू स्थित है ।
 यदि आपकी हस्तरेखा में कुण्डली के प्रथम स्थान में गुरू होने के इन तीन सकेंतो में से एक, दो या तीनो सकेंत है तो ही ये फलादेश आप पर लागू होगा यदि ये निशान नहीं है तो सभंव है कि आपकी कुण्डली गलत बनी हो उसमें जन्म समय,स्थान आदि में कोई अतंर हो । 
 यदि प्रथम भाव में सिर्फ गुरू हो दुसरा कोई ग्रह नहीं हो व सातवें भाव में भी कोई न कोई ग्रह हो मतलब सातवां खाना खाली नहीं हो तो जातक पढाई में होशियार होता है तथा बी.ए. या उससे भी उॅची डीग्री पास होता है तथा अपनी विधा के बल पर धनवान बन सकता है । 
 पहले खाने में गुरू व पाॅचवे खाने में बुध हो तो राजयोग बनता है अर्थात राजा की तरह होता है । 
 प्रथम भाव मेें गुरू वाले का भाग्य अपने दिमाग से ( दुसरो की सलाह न मानकर अपने दिमाग से काम करने पर ) व सरकारी कार्मिको के साथ मित्रता रखने पर बढता है ऐसे व्यक्ति को अपना भाग्य जगाने के लिए - 
1. धर्म पर चलना चाहिए (धर्म का अर्थ यहां इमानदारी, व नैतिकता का आचरण माना जावे ) 
2. दयालुता रखनी चाहिए । 
3. दुसरो की सलाह की जगह अपनी अतंरात्मा की माननी चाहिए । 
4. सरकारी कर्मचारियों व अधिकारीयों से मित्रता व सम्पर्क रखाना चाहिए ।
 आम तौर पर प्रथम स्थान में गुरू वाले लोगों की आखें की दृष्टि कभी खराब नहीं होती तथा उनके चश्मा नहीं लगता यदि फीर भी लगा है तो सूर्य का उपाय ( चाशुषोपनिषद ) करने से हट सकता है । 
 इस भाव वाले जातक शेर की तरह गुस्सा होते हुए भी साफ दिल के शांत वृति के मनुष्य होतें है जिनमें चालाकी को फोरन समझने ओर रोक देने की शक्ति होती है । शत्रुओं के होते हुए भी ऐसे जातक डरते नहीं है तथा विजय सदा साथ देती है। 
 परन्तु प्रथत भाव में गुरू होने के साथ यदि सातवां भाव खाली हो तो गुरू का पुरा लाभ नहीं होता ऐसे व्यक्ति का भाग्य शादी के बाद पत्नी से व ससुराल वालो से अच्छें सबंध बनाये रखे तो ही ज्यादा तरक्की करता है । ऐसे जातक ( प्रथम भाव में गुरू व सातवा खाली ) वाले की शादी 28 वर्ष की आयु से पुर्व कर दी जावे तो उसके पिता को हृदय व ब्लड प्रैशर आदि बीमारियां हो सकती है।
 दरअसल प्रथम भाव में गुरू व सातवां भाव रिक्त वाले जातक के पिता को अमुमन हद्वय की बीमारियां होने के आसार होते है। ऐसी स्थिति कब ज्यादा लागू होती है जब 
1. गुरू प्रथम व सातवा खाली या राहु आठवें या शनि सातवे भाव में हो तो जातक के पिता को हद्वयघात,अस्थमा, दिल की बीमारियों के होने के ज्यादा चासं होते है इसलिए ऐसे जातक पिता जी के उचित व्यायाम ,खानपान का ध्यान रखें । 
2. ऐसे जातक की शादि 24 वें से 27 वें साल के मध्य कर दी जावे तब 
 3. जातक के लडका पैदा होने के बाद 
 4. जातक के अपनी कमाई से मकान बनाने पर 
 ऐसा जातक 27-28 साल की आयु में पिता से अलग भी हो सकता है उसकी पिता से अनबन या बोलचान बंद हो सकती है । 
 उपाय - पिताजी की सेहत अच्छी रखने व दीघार्यु के लिये जातक को 400ग्राम गुड़@ खाण्ड़ @शक्कर निर्जन स्थान में दबा कर आनी चाहिये ।
 इस जातक की माता इसके लिये अच्छी होती है परन्तु इसकी माता व इसकी पत्नी में सबंध अच्छे नहीं होते । लग्न में गुरू वाजे जातक की 50 वर्ष की आय पूर्ण होने पर उसके 51 वे वर्ष में  उसकी माता का स्वास्थ्य गंभीर हो सकता है ( कृपया ध्यान रखे ऐसा होगा ही ये आवश्यक नहीं है इसमें अन्य खानो के ग्रह माता के खुद के ग्रह भी देखने चाहिये व ईश्वर इच्छा भी बलवती है लाल किताब जो कि मूल रूप से उर्दु भाषा में है उसमे भी लिखा है ‘‘ये दुनियावी हिसाबकिताब है कोई दावा ए खुदाई नहीं ।’’)
प्रथम स्थान में गुरू व सातवें स्थान में मंगल हो तो व्यक्ति जागीरदार परिवार से या खानदानी रईस परिवार से होता है ।
सूर्य खाना सं. 9 में हो व गुरू 1 में हो तो ऐसे व्यक्ति की खुद की आयु व उसके परिवार की आयु भी उसकी इच्छानुसार लम्बी होती है। 
 लग्न में गुरू वाला व्यक्ति यदि निर्धन हो तो उसको किसी के आगे हाथ नही फेला कर अपने भाग्य पर सतोंष रखना चाहिये तो वो धनवान बन सकता है । 
पितृ ऋण - लग्न में गुरू वाले के 2, 5, 9 वें व 12 वें स्थान में यदि बुध, शुक्र, शनि व राहु में से कोई भी ग्रह हो तो ये स्थिति पितृ ऋण कहलाती है ( यद्पि पहले में गुरू च 5 वें में बुध हो तो राजयोग भी होता है ।) पितृ ऋण का अर्थ है पिछले जन्म में पितरों, पूर्वजों, पिता व कुलगुरू का अपमान किया था उसका श्राप भोगना पड़ता है पितृ ऋण से क्या-क्या होता है जानिए -
1. पितृ ऋण की स्थिति में जातक की 8 से 21 वर्ष की आयु दुखद संघर्षमय बीतती है। 
2. गुरू प्रथम व शनि 5 वें में होना भी पितृ ऋण का घोतक है ऐसे में 36 वर्ष की आयु से 49 वर्ष की आयु के बीच ‘‘ बुरे कामों के जोर से स्वास्थ्य खराब पेशाब ओर शौच जाने की नाली तक दुखने लगे ’’ ऐसा लाल किताब कहती है इसका अर्थ है कि 36 वर्ष से 49 वर्ष के बीच ऐसे जातक यदि बुरे काम ( यौन सबंध ज्यादा बनाने में रहना ) करता है तो उसको बवासीर, शौच के समय जलन, प्रोस्टेट की बीमारी, पेशाब में जलन हो सकती है । साथ ही भाग्य साथ नहीं देवे दिल हिला देने वाले काम हो जो दुख देवे डरावनी घटनाए हो । 
 इस आयु के मध्य खुद के बनाए मकान पाप ओर गुनाह के ठिकाने बन जावे इन मकानों में रहने से खुद व सतांन बीमार रहे 
 इसका उपाय यह है - 1. यौन सबधों में शुचिता, नैतिकता बनाये रखे व ज्यादा कामुक न बनें । 
2. 400 ग्राम बादाम हनुमानजी, शनि के मदिंर में ले जावे आधे वहा चढाकर आधे प्रसाद के रूप में घर में ले आवें व हमेशा घर में रखे ( एयर टाईट पैक करके रखें ताकि खराब नहीं होवे ये बादाम जिदंगी भर रखें अगर खराब हो जावे तो नदी में प्रवाहित करके वापस करे )
 3. गुरू प्रथम व शनि 9 हो तो स्वयं का स्वास्थ्य खराब रहता है ( उपाय वही ब्रहमचर्य या यौन सबधं नैतिक व कम से कम उचित समय अतंराल से ही बनाए) 
4. गुरू प्रथम व शनि 7 में हो तो पिता से अलग होने के योग है । 
5. पितृ ऋण से आपकी उच्य शिक्षा में अड़चने आती रहेगी जब भी उच्य शिक्षा का प्रयास करेगें बीच में ही छोड़ना पडेगा। 
 पितृ ऋण की पहचान - अपने पैतृक घर , स्वयं के बनवाए घर के दरवाजे पर जाकर खड़े हो जावे । अपने सामनें देखे आपके सामनें  से 20 कदम से 50 कदम दुर या आपके बायें तरफ 20 कदम से 50 कदम दुर कोई पीपल का पेड़ , मंदिर है तो पितृ ऋण ओर भी पुख्ता है।
 भगवान ने वही इलाज भी दिया है इस पीपल के पेड़ में पानी देना, इसकी देखभाल करना व उस मंदिर में सहायता देना मंदिर में रहने वाले पुजारी , पुरोहित की सेवा करना ही पितृ ऋण का सबसे बड़ा उपाय है ।
प्रथम भाव में गुरू होने व ग्रहों से बने अन्य योग 1. प्रथम गुरू ओर राहु 8 या 11 में हो तो आखें खराब हो सकती है पिता को दमा, हार्ट की बीमारिया हो सकती है खुद का दिमाग बिगड जावे या टागों की बीमारी टांग कापना, टांग सूखना आदि बीमारीया हो सकती है । 
2. प्रथम गुरू व सूर्य 9 या 11 में तो मुकदमा बाजी , दीवानी उलझनो में धन हानी ( चाहे फैसला जातक के हक में ही हो ) परन्तु भाग्य खराब व हिम्मत जबाब दे देगी । 
 3. प्रथम गुरू व 8 या 11 में बुध, शुक्र, राहु व शनि हो तो जातक दूसरो की निदां करे व दुसरो को श्राप देवे इससे उल्टा असर होगा व दुसरो की निदां करने व श्राप देने से ऐसे जातक का खुद का बुरा होगा । 
 विशेष - लग्न ( प्रथम भाव ) में गुरू वाले सभी जातक दूसरो की निदां, चुगली व श्राप देना तो छोड ही देवे इसमे ही वो बरबाद होते है ।
क्रमशः अगला भाग 15-20 दिन में प्रकाशित होगा ।
 आपकी जन्म पत्रिका के लग्न में जो ग्रह हो वो कमेंट में लिखे अगले 2 भागों में राहु ग्रह एंव शनि ग्रह लग्न में होने पर प्रकाश डाला जायेगा ।
आपकी लग्न में गुरू , राहु, शनि के अलावा कोई ग्रह हो तो कमेंट में लिखे ताकि उससे अगला भाग उस ग्रह पर लिखा जा सके ।
इस आलेख का अगला भाग निम्न लिंक पर पढें:-

लाल किताब की सहायता से स्वयं जानिये अपना भविष्य पार्ट - 3 (प्रथम भाव लग्न में राहु होने का फलादेश)

Thursday, January 21, 2016

लाल किताब से स्वंय जाने अपना भविष्य भाग 1 Learn Lal Kitab Astrology in Hindi Part 1


लाल किताब ज्योतिष की एक अनमोल पुस्तक है।इस पुस्तक को फगवाड़ा के किसी श्री रूपचंद जोशी पंडित ने उर्दुभाषा में लिखा था आजकल कतिपय टीवी प्रोग्रामों में लाल किताब के नाम पर जो कुछ बेचा जा रहा है उसके बारे में मैं ज्यादा तो नहीं जानता परन्तु उनका फ्री सैम्पल मैने ओनलाईन अपनी जन्मपत्रिका का बनवाया तो मैं कह सकता हुं कि उसका लाल किताब से कोई दुर दुर तक का वास्ता नहीं है तथा इसकी अत्यधिक मंहगी किमत को देखकर मैने निर्णय लिया है कि मैं धीरे धीरे श्रखंलाबद्व लाल किताब की ज्योतिष का अनमोल ज्ञान आप तक पहुंचा कर जनसाधारण को इस विषय में पारंगत कर सकता हुं ताकि वो अपनी ज्योतिष लाल किताब की सहायता से स्ंवय जानकर आर्थिक रूप से सुरक्षित रहते हुये अपनी जीवन यात्रा को सुगम बना सके।
नास्तिक व्यक्ति भी कृपया अपनी जन्म पत्रिका का लाल किताब से अध्ययन अवश्य करें ताकि उनको पता चल सके कि इस संसार में आपके साथ जो कुछ भी हो रहा है वो ईश्वर की अदभुत व्यवस्था से हो रहा है तथा आप इस व्यवस्था को बदल तो नहीं सकते परन्तु सजग रहकर बहुत कुछ अपने बचाव में भी  कर सकते हैं।
तो आईये ज्यादा विस्तार न करके आपको सीखायें कि आप कैसे इस विधा से ज्योतिष में  पारंगत बन सकते हैं।
पहले किसी भी कम्प्यूटर सोफटवेयर से या ओनलाईन अपनी जन्म पत्रिका बनावें।
अब उसमें लग्न कुण्डली देखें।
लग्न कुण्डली इस प्रकार दिखायी देगी।

अब इस लग्न कुण्डली में जहां मैने पहला खाना लिखा है उस खाने में आपके कौनसा ग्रह स्थित है वो इस ब्लोग पोस्ट के कमेंट में लिखें।
अगले भागों में मैं इस ब्लोग पोस्ट में आये कमेंटों के वरियता क्रम से यह प्रकाशित करूंगा कि लाल किताब के अनुसार आपके पहले खाने में स्थित ग्रह का क्या फलादेश होता है।
कृपया कमेंट में अपनी जन्म तारिख जन्म स्थान समय आदि नहीं लिखें केवल आपके पहले खाने में कौनसा ग्रह है उसका नाम ही लिखें आपके पहले खाने में ग्रह एक से ज्यादा हो तो भी लिखें उनका फलादेश भी अलग अलग व एक साथ होने का क्या अर्थ है आगामी पोस्टों में बताया जावेगा।
कृपया ध्यान रखें जहां मैने पहला खाना लिखा है उसी जगह को पहला खाना मानकर वहां का ग्रह ही बताना है भले ही आपकी जन्म पत्री में उस जगह पर 11, 5,6, या कोई भी नम्बर लिखा हो जैसे निम्न लग्न कुण्डली देखें यहां उस जगह पर 11 व केतु ग्रह लिखा है तो इसका अर्थ यही है पहले खाने में केतु है।


Saturday, December 19, 2015

ईश्वास्यमिदं सर्वम । आओ प्रेम के प्रयोग से बीमारियों पर विजय पायें।

आज मैं आपको बताउंगा की कैसे आप अपने बचपन में लोट सकते हैं जब आप बच्चे थे तो आपको वो कोई बीमारी नहीं थी जो आज है। क्या आपने किसी बच्चे के ब्लड प्रैशर सुना है? पहले बच्चों के शुगर भी नहीं होती थी परन्तु आजकल होती है उसकी वजह डोक्टरों द्वारा बच्चों पर पीपीआई ( प्रोटोन पम्प इन्हीबेटर ) का रेगुलर उपयोग करना मैं मानता हुं यह मेरे अगले आलेख में मैं आपको बताउंगा कि कैसे आपके चिकित्सक आपको मधुमेह व घुटनों का दर्द मुफत दे रहें हैं।
आज का मूल विषय यह है कि हम बच्चे थे तो हमें डीप्रेशन क्यों नहीं था? हमें रात को नीदं की गोली खाये बगैर नींद क्यों आती थी? हम इतने खुश व उत्साहित क्यों रहते थे? हमें कुछ भी खा लेने पर एसिडीटी क्यों नहीं होती थी? हमें थायराईड व डायबिटीज क्यों नहीं थी?
दरअसल आज की इन सभी समस्याओं का राज यर्जुवेद के 40 वे अध्याय में छुपा है जिसे ईशोपनिषद कहा जाता है यदि आप साईं बाबा को मानते हैं तो आपने सांई सत्तचरित्र का अध्ययन किया होगा उसमें भी ईशोपनिषद की शिक्षाओं का सांई बाबा भी उपदेश करते थे इसके बारे में बताया गया है।
यर्जुवेद के 40 वें अध्याय का पहला श्लोक है
ईश्वास्यमिदं सर्वम
अर्थात सभी वस्तुएं ईश्वर से ओतप्रोत है ओर हमें सभी प्राणियों में ईश्वर का दर्शन करना चाहिये जैसे छोटे बच्चे करते हैं। आप फिर चौंक गये होगें कि छोटे बच्चे सभी प्राणियों में ईश्वर का र्दशन कहां करते हैं? इसका अर्थ है छोटे बच्चे जातिवाद धर्म मत सम्प्रदाय के आधार पर भेदभाव नहीं करते छोटा बच्चा कुते के पास भी खेलने चला जाता है वो कुते को देखकर भी आत्मियता से हंसता है उसकी आाखों में देखो आप किसी छोटे बच्चे को पुचकारों वो आप की तरफ भी उसी प्रेम व आत्मियता से देखने लगेगा वो नहीं सोचता कि आपकि जाति क्या है आप किस धर्म मत पंथ को मानते हैं वो नहीं देखता कि आप पद में उससे बड़े हैं या छोटे वो नहीं देखता कि आप उसके क्या लगते हैं?
आप इन सब बातों को नहीं मानते क्यों कि ये विज्ञान का युग है आपको ऐसे उपदेश अच्छे नहीं लगते व बकवास लगते हैं चलो इसकी एक प्रयोग द्वारा पुष्टि करें क्यों कि मैं भी विज्ञान का विर्धाथी हुं तथा विज्ञान को मानता हुं इसलिये एक प्रयोग करते हैं
कल सिर्फ एक दिन जब आप सोकर उठें तब से लेकर शाम को सोने जाने से पूर्व मन में इस वाक्य को याद रखें कि
ईश्वास्यमिदं सर्वम
इस एक दिन आप सभी को अपना माने सभी से प्रेम से रहें सभी में अपने इष्ट देवता या भगवान के दर्शन करें सभी से हंसकर बात करें किसी की बुराई दिल से न करें मुंह से निकल जावे तो कोई बात नहीं एकदिन अखबार नहीं पढें इस एक दिन टीवी पर न्यूज चैनल नहीं देखें क्यों कि नकारात्मक खबरों से आप यह भुल जावेगें कि ईश्वास्यमिदं सर्वम व आप भी बुराईयां करके अपना दिल जलाने लगेगें व अपने खुद के हार्मोन बिगाड़ लेगें।
एक दिन आप ऐसी जिंदगी जी लेगें तो मुझे बताने कि जरूरत नहीं की आपके साथ कितने चम्तकार होगें यह आप प्रयोग करने के बाद कमेंट में स्वंय बतावेंगें तो ज्यादा अच्छा लगेगा।
इससे सबंधित अन्य आलेखः-

Thursday, July 23, 2015

हनुमान जी के विवाह का रहस्य (Mystery of Hanuman Ji Suvarchala Ji Marriage)


इन दिनों सोशल मीडीया पर हनुमान जी की उनकी पत्नी के साथ फोटो शेयर की जा रही है । परन्तु लोग समझ नहीं पा रहे की ब्रहमचारी हनुमान जी के साथ ये पत्नी जी कहां से आ गयी। 

नयी पीढी के लोग हिन्दु शास्त्र पढते ही नहीं धारावाहिकों से जो अधकचरा ज्ञान मिलता है उसे ही लेकर चलते हैं। इसलिये भगवान से प्रेम करने की जगह उनसे डरते हैं। 
तो आईये हम जानते हैं हनुमान जी के विववाह का रहस्य (Mystery of Hanuman Ji Suvarchala Ji Marriage) संकटमोचन हनुमान के बृहमचारी रूप से सारे परिचित हैं । उनहें बाल बृहमचारी भी कहा जाता हैं। लेकिन आपने कभी यह सुना हैं कि हनुमान जी का विवाह हुआ था?  उनका और उनकी पत्नी के साथ मंदिर भी हैं । ( Hanuman ji Temple with Wife)जिनके दर्शन के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं । कहा तो यह भी जाता हैं कि हनुमान जी और उनकी पत्नी के दर्शन करने के बाद पति और पत्नी के बीच चल रहा तनाव समाप्त हो जाते हैं।  
आंध्र प्रदेश के खम्मम जिले में हनुमान जी का मंदिर काफी मायनों में खास हैं । खास इसलिए कि हनुमान जी अपने बृहमचारी रूप में नही बल्कि गृहस्थ रूप में अपनी पत्नी सुवरचला के साथ विराजमान है।
हनुमान जी के सभी भक्त यह मानते आये हैं कि वह बाल बृहमचारी थे और बालमीकि,करभ, सहित किसी भी रामायण और रामचरित मानस में उनके बृहमचारी के रूप का वर्णन मिलता हैं लेकिन पराशर संहिता में उन विवाह का उल्लेख हैं ( Parasher Shanhita give first evidence of Hanuman ji marriage) इसका प्रमाण आंध्र प्रदेश में खम्मम जिले में बना मंदिर हैं।(suvarchla Hanuman ji temple of Telangana Khamam district) यह मंदिर याद दिलाता हैं कि रामदूत के इस चरित्र का जब उन्हें विवाह के बंधन में बंधना पड़ा था ।
हनुमान जी ने सूर्य देव को अपना गुरू बनाया था । सूर्य देव उन्हें तरह-तरह की विधाओ का ज्ञान देते। लेकिन हनुमान जी को ज्ञान देते समय संकट खड़ा हो गया । कुल नौ तरह की विधा में से पाँच तरह की विधा तो सिखा दी लेकिन चार तरह की विधा और ज्ञान ऐसे थे कि वह केवल किसी विवाहित को ही सिखाये जा सकते थे । 
हनुमान जी पूरी शिक्षा का प्रण ले चुके थे और इससे कम वह सिखने को राजी न थे। इधर भगवान सूर्य के सामने संकट था वह धर्म के अनुशासन के कारण किसी अविवाहित को कुछ विशेष विधा नही सिखा सकते थे ऐसी सिथति में भगवान सूर्य देव ने सलाह दी और अपने प्रण को पूरा करने के लिए वह मान गए । लेकिन हनुमान जी के लिये दुल्हन कौन हो और कहा से वह मिलेगी इसे लेकर सभी चिंतित थे । तब सूर्य देव ने राह दिखलाई । 
तब सूर्य देव ने अपनी परम तपस्वी और तेजस्वी पुत्री सुवरचला को हनुमान जी के साथ विवाह के लिए तैयार कर लिया। उसके बाद हनुमान जी ने अपनी शिक्षा पूरी की । सुवरचला सदा के लिये तपस्या में रत हो गई। 


इस तरह भले ही हनुमान जी शादी के बंधन में बंध गए हो ।लेकिन वह शारीरिक रूप से आज भी बृहमचारी ही हैं। पराशर संहिता में तो लिखा हैं कि सूर्य देव इस विवाह पर यह कहा हैं कि यह विवाह बृहमाणड के कलयाण के लिए हुआ है
Who was suvarchla?
Suvarchla was daughter of sun an wife of Hanuman ji
Who was guru of hanuman ji
Sun 

 महेश चन्द्र कौशिक पिण्डवाडा www.hindidugdugi.blogspot.in

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भूत देखने के लिये प्रयोग

आप भूत प्रेत नहीं मानते हो तों एक सरल सा प्रयोग मैं आपको बता देता हूं ताकि आप भूत जी के दर्शनों का लाभ उठा सकें यह प्रयोग मुझे एक तांत्रिक न...