पाठकों से निवेदन

इस ब्लोग पर तंत्र, मंत्र, ज्योतिष, वास्तु व अध्यातम के क्षेत्र की जानकारी निस्वार्थ भाव से मानव मात्र के कल्याण के उद्देश्य से दी जाती है तथा मैं कोई भी फीस या चन्दा स्वीकार नहीं करता हुं तथा न हीं दक्षिणा लेकर अनुष्ठान आदि करता हुं ब्लोग पर बताये सभी उपाय आप स्वंय करेगें तो ही लाभ होगा या आपका कोई निकट संबधी निस्वार्थ भाव से आपके लिये करे तो लाभ होगा।
साईं बाबा तथा रामकृष्ण परमहंस मेरे आदर्श है तथा ब्लोग लेखक सबका मालिक एक है के सिद्धान्त में दृढ़ विश्वास रखकर सभी धर्मों व सभी देवी देवताओं को मानता है।इसलिये इस ब्लोग पर सभी धर्मो में बताये गये उपाय दिये जाते हैं आप भी किसी भी देवी देवता को मानते हो उपाय जिस देवी देवता का बताया जावे उसको इसी भाव से करें कि जैसे पखां,बल्ब,फ्रिज अलग अलग कार्य करते हैं परन्तु सभी चलते बिजली की शक्ति से हैं इसी प्रकार इश्वर की शक्ति से संचालित किसी भी देवी देवता की भक्ति करना उसी शाश्वत निराकार उर्जा की भक्ति ही है।आपकी राय,सुझाव व प्रश्न सीधे mckaushik00@yahoo.co.in (read 00 as zero zero) पर मेल कीये जा सकते है।

Saturday, September 9, 2017

नवरात्रा कलश स्थापना का मुर्हत, नवरात्रि में क्या पूजा करें, नवरात्रा व्रत में क्या खायें? शारदीय नवरात्रि 2017

इस वर्ष 21 सितम्बर 2017 से शारदीय नवरात्रा शुरू हो रहें हैं नौ दिन तक चलने वाले इस हिन्दू धर्म के महापर्व को हर हिन्दू को अवश्य मनाना चाहिये क्यों कि इससे आपको वर्ष भर तक शक्ति सौभाग्य आरोग्य व सुख समृद्धि प्राप्ति होती है। 
शारदीय नवरात्रि 2017 कलश स्थापना का मुर्हत:-
21 सितम्बर 2017 गुरूवार को प्रात 6 बजे से 7 बजकर 30 मिनट तक शुभ का चौघड़िया है इसमें घट स्थापना कर सकते हैं क्यों कि कुछ साधक प्रातः काल घट स्थापना होने तक कुछ भी खाते पीते नहीं है उनको प्रात काल के इस महुर्त में घट स्थापना कर लेनी चाहिये। 
 कुछ साधक अभिजीत मर्हंत में घट स्थापना करना चाहते हैं उनको दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 24 मिनट के बीच में घट स्थापना करनी होगी क्यों कि इस दिन 12 बजे से लेकर 1 बजकर 30 मिनट तक लाभ का चौघड़िया है जो लोग दुकानों व व्यापारिक प्रतिष्ठानों में घट स्थापना करना चाहते हैं उनके लिये भी लाभ के चौघड़िया में घट स्थापना करना उतम है। 
यहा स्पष्ट रहे कि अभिजित महुर्त 11 बजकर 36 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट तक है व लाभ का चौघड़िया 12 बजे से लेकर 1 बजकर 30 मिनट तक माना गया है इसलिये 12 बजे से 12 बजकर 24 मिनट का समय ऐसा है कि उसमें लाभ का चौघड़िया एवम अभिजित मर्हुत दोनो ही है। 
नवरात्रि में क्या पूजा करेंः-
नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ पूर्ण विधि विधान से करना सबसे श्रेष्ठ पूजा है परन्तु जिन लोागें को सम्पूर्ण दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों का पाठ करना मुश्किल जान पड़ता है तथा 13 अध्याय के साथ साथ उसके 6 अंगों का पाठ भी करना पड़ता है जो कवच अर्गला स्त्रोत व कीलक कहलाते हैं 
ये सब आजकल के व्यस्त जीवन में गृहस्थों को करना काफी मुश्किल लगता है उनके लिये मूर्ति रहस्य में स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि केवल मध्यम चरित्र अर्थात दुर्गा सप्तशती के अध्याय 2, 3 एंव 4 का पाठ कर लेने से ही समपूर्ण दुर्गा सप्तशती के पाठ के फल की प्राप्ति हो जाती है 

 अतः मेरी राय में आप दुर्गा सप्तशती के अध्याय 2, 3 व 4 का पाठ कर लेवें साथ में सिद्ध कुंजिका स्त्रोत पढ लेवें में स्वंय भी इतना ही करता हुं । आप गीता प्रेस गोरखपुर की दुर्गा सप्तशती हिन्दी व संस्कृत में इस लिंक से मुफत डाउनलोड कर सकते हैं:- 
जो साधक ओनलाईन दुर्गा सप्तशती मंगवाना चाहें वो गीता प्रोस गोरखपुर की छपी हुयी दुर्गा सप्तशती अमेजन के इस लिंक से मात्र 50 रूपये में ओनलाईन मगंवा सकते हैं:- 
दुर्गा सप्तशती का शापोद्धार व कीलक क्या हैः- 
कहते हैं कि सतयुग में दुर्गा सप्तशती के मन्त्र इतने जागृत व स्वयम सिद्ध थे कि इसका पाठ करने वाला कोई भी व्यक्ति अनेक सिद्धिया प्राप्त कर लेता था फिर उन सिद्धियों के दुरूपयोग से समाज में आतंक होने लगा तो महादेव जी ने इन मन्त्रों को कीलीत करने का श्राप दे दिया
जिससे अब वर्तमान समय में शापोद्धार व कीलक का प्रयोग करके ही दुर्गा सप्तशती का पाठ सफल किया जा सकता है जो लोग सम्पूर्ण दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं उसमें तो शापोद्धार व कीलक के मन्त्र विशेष है जो शुरू में ही पढने होते हैं पर जो पुरी दुर्गा सप्तशती नहीं करके केवल मध्यम चरित्र अर्थात दुसरा तीसरा व चौथा अध्याय ही करना चाहते हैं उनको शापोद्धार व कीलक करना है या नहीं? 

ये प्रश्न अक्सर देवी भक्तों के मन में रहता है। इसका समाधान दुर्गा सप्तशती के ही कीलक स्त्रोत में दिया है जिसके अनुसार भगवती का साधक कृष्ण पक्ष की अष्टमी या चतुर्दशी को भगवती की सेवा में अपना समस्त धन आदि समर्पित करते हुये मन ही मन भावना करे कि आज से मैने मेरा सब कुछ आपको समर्पित कर दिया है उसके बाद ऐसी धारणा करे कि मां कह रही है कि बेटा संसार यात्रा के निर्वाहण हेतु तुं मेरा ये धन प्रसाद बुद्धि से ग्रहण करके उचित रीती से व्यय कर उसके बाद अपना सब कुछ भगवाती को दिया हुआ मानकर प्रसाद बुद्धि से सदुपयोग करे तो इससे सप्तशती का शापोद्धार होता है। 
अर्थात आपको नवरात्रा प्रारंभ होने से दो दिन पहले जो कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी आती है उसमें पहले उक्त विधी से शापोद्धार करके फिर नवरात्रा में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना होगा । 
जो दुर्गा सप्तशती नहीं करना चाहते वे प्रतिदिन तीन माला नवार्ण मन्त्र की कर सकते हैं साथ में सिद्ध कुंजिका स्त्रोत पढ लेवें सही नवार्ण मन्त्र निम्न है इसके अन्त में नमो या नम नहीं लगता:-
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे 
 नवरात्रा व्रत में क्या खायें? :-
नवरात्रा व्रत में अनेक प्रकार से कर सकते हैं इसमें यदि एक समय केवल कच्चे फल व सलाद खाकर व्रत करें तो सबसे अच्छा होता है 
पर ये केवल कच्चे फल व सलाद खाकर व्रत नौकरीपेशा व्यक्ति व आजकल के गृहस्थी जो पहले से ही अनेक बीमारियों से घिरे हैं तथा जिनको कच्चा खाने की आदत नहीं है वे नहीं कर सकते या करने का प्रयास करते हैं तो उनको गैस एसिडीटी आदि बीमारियां हो सकती है 
इसलिये आप एक समय कच्चे फल सलाद आदि व दुसरे समय भोजन करके भी व्रत कर सकते हैं केवल भोजन में प्याज लहसून व मासांहार का प्रयोग नहीं करें। 
नवरात्रा पर भूखे मरने की आवश्यकता नहीं है आपके लिये प्रतिदिन आप अलग अलग सात्विक स्वादिष्ठ फलाहार कैसे तैयार कर सकते हैं इसकिे लिये कुछ विडियो का संकलन भी किया है आप यूटयूब पर विडियो देखकर आसानी से घर पर सात्विक फलाहार बनाकर भी व्रत कर सकते हैं प्रतिदिन अलग अलग फलाहार खाने के लिये निम्न यूटयूब के विडियो के लिंक से आप विडियो देख सकते हैंः- 
1. केवल दुध से बने स्वादिष्ठ राजभोग का विडियो:- 

2.फलाहारी डोसा व नारियल की चटनी बनाने का विडियोः- 

3.स्वादिष्ठ फलाहारी खिचड़ी बनाने का विडियोः- 

4. फलाहार के लिये स्वादिष्ठ मोमोज बनाने का विडियो:- 

5. दुध से बने स्वादिष्ठ फलाहारी रसगुल्ले का विडियो :-

6.फलाहारी स्वादिष्ठ दुधी या लौकी का हलवा बनाने का विडियोः- 

7. फलाहारी नारियल के लडडू बनाने का विडियोः- 

8.पाउडर के दुध से बने स्वादिष्ठ पेड़े का विडियो:- 

9.फलाहारी शयामक के पापड़ बनाने का विडियो- 

10. फलाहारी केसर बरफी बनाने का विडियोः- 
11.साीधे आलु से बगैर सुखाये कुरकुरे वैफर्स बनाने की विधी का विडीयोः-


सााधना में आपकी प्रगति के सूचक:- 
हम नवरात्रा व्रत पूरी श्रद्धा और भक्ति व प्रेम से करते हैं तो हमें भी ये जाानने का हक रहता है कि क्या हमारी भक्ति फलीभूत हो रही है क्या माता हमारी पूजा ग्रहण कर रही है?
 इसके लिये निम्न सूचक अपनायें याद रखें ये सूचक परीक्षा के रूप में नहीं अपनाने हैं आप माता को प्रार्थना करें ये आपकी या मेरी भक्ति की परीक्षा नहीं है केवल मेरे श्रद्धा व विश्वास को बढाने व मेरे मन में और ज्यादा भक्ति जगाने का प्रयास है इसमें आप कृपया भक्ति की परीक्षा नहीं माने क्यों कि जिसने हमें बनाया है हम ना तो उसकी परीक्षा ले सकते ना हि हम उनको कोई परीक्षा दे सकते हैं इसलिये यहां जो सकेंत बताये गये हैं वो आपके साथ हो तो आप रोमांचित महसूस करकें अपनी भक्ति को और बढायें
तथा  तथा नहीं हो तो भी आप निराश नहीं हो इसे अपनी साधना की असफलता नहीं माने तथा माता से प्रार्थना करें कि वो आपके मन का अधंकार आपके अन्दर के तमोगुण दुर करके आपकी भक्ति व प्रेम को जगा देवे जिससे आपको इन सकेंतों का अनुभव मिल सके। 
1. आप कच्चा नारियल छिल कर माता की चौकी पर भेंट स्वरूप रखें तथा यदि नारियल अपने आप चिटक जाये अथा्रत उसमें दरार आ जाये तो समझें माता ने आपकी प्रेमपूर्वक की गयी भेंट को स्वयं स्वाकार कर लिया है। 

2.आप पंचमेवा का प्रसाद चढायें तथा प्रसाद में कुमकुम दिखायी दे तो इसे माता द्वारा प्रसाद ग्रहण करने का सूचक माने। 

3.आप नवरात्रा पर कलश स्थापना करते समय गेहूं या जौ के ज्वारे उगायें इनमें यदि सफेद रंग का ज्वारा उगे तो इसे माता की कृपा का प्रतिक जाने।

4. यदि ज्वारों की लम्बाई कलश पर रखे नारियल से भी ज्यादा हो जाये तो भी इसे माता की कृपा व आपके प्रति प्रेम का सूचक मानें। 

5.यदि आपको स्वपन में माता से संबधित अलौकिक अनुभव हो तो उसे भी अपने उपर कृपा मानें। 
6. यदि कुछ भी अनुभव नहीं हो तथा उपर लिखे सकेंत में से कोई सकेंत नहीं हो तो भी आाखें बंद करके अपने आप को माता के प्रेम से सरोबार करके निवेदन करें कि माता मुझे कोई सकेंत नहीं देकर आपने मुझे अवसर दिया है कि मैं मेरी भक्ति को और भी बढाउं मैं मेरे तमोगुण को ओर भी कम करके आपके प्रति ओर ज्यादा श्रद्धा रखूं ऐसा आपने मुझे आदेश दिया है। 
सोशल मिडीया व्यापिनी भक्ति:- 
भक्ति का ये नया रूप व नया नाम मैने स्पेशल आपके लिये दिया है आप इस पोस्ट को मन में माता को भक्तिपूर्वक याद करके सोशल मिडीया पर शेयर करेगें तथा इस जानकारी से किसी को लाभ पहुंचेगा तो आपको सोशल मिडीया व्यापिनी भक्ति का लाभ मिलेगा इससे आपको क्या फायदा होगा ये सिर्फ अनुभव करने की बात है। 
इसलिये ज्यादा से ज्यादा लोागों तक शेयर करके उनको नवरात्रा के बारे में जागरूक करें तथा आप भी सोशल मिडीया व्यापिनी भक्ति का लाभ लेवें।
अपनी शंका का समाधान कैसे करेंः- 
 आप निम्न लिंक पर कमेंटस में अपने प्रश्न पुछकर अपनी शंका का समाधान कर सकते हैं यदृपि लेखक के द्वारा सभी कमेंटस का जबाब देने का पूरा प्रयास किया जायेगा पर संभव है कि ज्यादा कमेंटस आ जाने पर या लेखक के अत्यधिक व्यस्त होने पर आपको जबाब ना भी मिले।

Friday, April 7, 2017

फल की इच्छा से मुक्त होकर अपना कर्म करिये

   ज्यादातर लोग अपना कर्म भगवान के लिये न करके नौकरी बचाये रखने के लिये, बॉस की खुशी के लिये, पैसे कमाने के लिये करते हैं आपको कर्म वही करना है बस नजरिया चेंज करना है कि आप कर्म कंपनी नौकरी बॉस या पैसे के लिये न करके भगवान के लिये कर रहें हैं। 

 इसे ही निष्काम कर्म कहते हैं अर्थात् आप अपने कर्म को पुरस्कार या लाभ की आशा से मत किजिये आप अपने कार्य को कुशलता से भगवान का कार्य मानकर भगवान को खुश करने के लिये किजिये बॉस की चापलुसी करना बंद करके भगवान को अपना बॉस मानिये बॉस से पदोन्नति पुरस्कार व सम्मानित होने की आशा का त्याग कर दीजिये क्यों कि आप उस सर्वशक्तिमान ईश्वर के लिये जब कार्य करेगें तो आपको नाशवान दुनिया के झूठे व काल्पनिक पुरस्कारों व सम्मान प्राप्ति के लिये अपना खुन जलाने की आवश्यकता नहीं है क्यों कि जब आप इन पुरस्कारों व सम्मान की आशा त्याग देगें तो भगवान की तरफ से मिलने वाले पुरस्कार आपको दंग कर देगें।
  अतः आपको फल की इच्छा से सकाम कर्म नही करना चाहिए कोई भी कर्म मात्र ईश्वर की इच्छा मान कर ईश्वर के निमित करना चाहिए। अपने सभी कर्मो को भगवान के लिये सम्पूर्ण कुशलता से पूरा करने वाला कर्मो के बंधन से मुक्त हो जाता है। 
   अतः कर्म योग में कर्मो के फलो को त्याग कर व्यक्ति जन्म मरण के बंधन से छुटकर अमृतमय परमपद (मोक्ष) को प्राप्त होता है। अपने धर्म का पालन करते हुए और कर्तव्य कर्म का आचरण करते हुए यदि युद्ध जैसी विकट परिस्थिति भी उत्पन्न हो जावे तब सुख-दुःख, लाभ-हानि, विजय- पराजय का विचार किये बिना युद्ध भी किया जाना उचित है। 
   अर्थात् आप यदि अपना कर्म भगवान के लिये निस्वार्थ भाव से कर रहें है तथा आप पर कोई लांछन लगाता है या आप पर गलत आरोप लगाता है या आपको प्रताड़ित करने या आपका शोषण करने का प्रयास करता है तो उसे करारा जबाब देना भी आपका दायित्व है क्यों कि गीता आपको कायरता नहीं सिखाती है कायरता तो कामचोर व आलसी लोग दिखाते हैं आप अन्याय अत्याचार व शोषण के विरूद्ध निस्वार्थ भाव से आवाज उठाते हैं तो ईश्वर से प्राप्त सहायता के कारण आपको विजय भी मिलेगी। 
ये अंश मैने मेरी नयी पुस्तक "गीताज्ञान से मन की सुप्त शक्तियों को जागृत कैसे करें?" में से लिये हैं आपको यदि इस ज्ञान में रूचि उत्पन्न हुयी हो तो आप निम्न लिंक से मेरी नयी पुस्तक "गीताज्ञान से मन की सुप्त शक्तियों को जागृत कैसे करें?"ले सकते हैंः-
   
भारत में ई बुक के लिये लिंकः-http://amzn.to/2oQYrG9
भारत में पेपरबैक पुस्तक के लिये लिंकः-Gita Gyan Paperback from Pothi
अमेरिका (USA) or Canada में ई बुक के लिये लिंकः-http://amzn.to/2p9P0Bc
अमेरिका में पेपरबैक पुस्तक के लिये लिंकः-http://amzn.to/2nSJTF7
यूरोप में ई बुक के लिये लिंकः-http://amzn.to/2nm4vJN
यूरोप में छपी हुयी पुस्तक के लिये लिंकः-http://amzn.to/2oRaK5u
अन्य किसी भी देश में के लिये लिंकः-http://amzn.to/2nSJTF7

Friday, October 14, 2016

लक्ष्मी प्राप्ति हेतु प्रभावशाली दीपक साधना का रहस्य।


इस दीपावली पर फेसबुक व व्हाटसअप द्वारा फैलायी गयी जागरूकता के कारण चाईना की बनी हुयी लाईटों की मांग न के बराबर रह गयी है परन्तु बहुत कम लोग जानते हैं कि वास्तव में दीपावली में जयपुर में बने कासें के दीपक में तिल का तेल जलाने की परम्परा क्यों थी।

क्या है कासें के दीपक व तिल के तेल को जलाने का महत्व आज हम इसी पर प्रकाश डाल रहें हैं आप इसे पढें तथा कृपया सभी ग्रुपों व मित्रों में शेयर करने की सेवा भी करें क्या पता आपके छोटे से शेयर के कारण किसी की जिदंगी प्रकाश से भर जावे।

 क्या आप दीपावली ( Dipawali) को दीपक जलाने का रहस्य जानते हैं?


क्या आप जानते हैं कि दीपावली को लक्ष्मी प्राप्ति व ऋण मुक्ति से क्यों जोडा गया है क्या आप दीपावली मनाते हैं उसके बाद भी आप अगली दीपावली तक लक्ष्मीवान नहीं बन पाते? 
तो यह आलेख आपके लिये है। 
दरअसल दीपावली अमावस्या के दिन आती है जो शनि का दिन होता है हमारे ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि ग्रह की उच्च स्थिती व उनकी कृपा से ही मनुष्य धनवान होता है व मकान बनवा पाता है।इसलिये दीपावली को जो तिल के तेल के दीपक जलाने का रिवाज है वो तेल अमावस्या होने से शनि ग्रह की दशा ठीक करने के लिये जलाया जाता है। 
क्या आप दीपावली को मोमबतियां जलाते हैं? 
दीपावली को सरसों के तेल के दीपक जलाते हैं? 
 सिर्फ इलैक्ट्रोनिक लाईटें लगाते हैं सोचते हैं दीपकों के झंझट में कौन पड़े?
 तो आप गलत कर रहें हैं दीपावली को कम से कम सवा लीटर तिल के तेल के दीपक जलाने से मनुष्य पर चल रही शनि की दशा उतर जाती है तथा वो धनवान व ऋणमुक्त बनता है उसे व्यापार धन्धे में फायदा होता है घर में फिजुलखर्च नहीं होते।  ( Shani shadna to attract money and wealth)
चलिये अबके दीपावली को कम से कम सवा लिटर तिल्ली का तेल ( Sesame Oil) जलावें तथा यदि आप सोच रहें है दीपावली तो बहुत दुर है तो दीपावली के स्थान पर आप किसी भी अमावस्या को तिल के तेल के पांच दीपक जला कर घर की छत पर रख सकते हैं यदि आप यह प्रयोग दीपावली के अलावा अन्य अमावस्या को कर रहें हैं तो सवा लिटर तिल के तेल के दीपक एक साथ जलाना अनिवार्य नहीं है आप पांच दीपक जला सकते हैं उससे भी लाभ होगा।
 तथा कृपया यह भी ध्यान रखें कि सवा लीटर तेल की शर्त न्यूनतम है आप अपनी आस्था व हैसियत के अनुसार जितना ज्यादा तिल के तेल के दिये जलावेगें उतना ही आपको लाभ पहुंचेगा शनि भगवान पर तेल चढाने का भी यहि रहस्य है आप शनिवार को भी तिल के तेल का दीपक (जलाकर) अपने घर के बाहर शनि भगवान के नाम का रख सकते हैं उस दीपक पर सिदुंर का तिलक लगाना ओर भी अच्छा रहता है।( Burn Sesame Oil Deepak With Sindur Marking on Deepak at Every Saturday for Shani Kripa)
आप कासें के बने असली जयपुरी दीपक घर बैठे अमेजन से मंगवा सकते हैं कासें के दीपकों का धार्मिक व अघ्यातमिक महत्व तो है ही साथ ही इनकी रीसेल वैल्यू भी है 
तो यह रहा अमेजन का लिंक जिस पर जाकर अभी ओर्डर करने से आप घर बैठे यह दीपक मंगवा कर उपर बताया प्रयोग कर सकतें हैंः-
 Click on this Amazon Link for Buy Bronze Metal Deepak 

अगली दीपावली तक चम्तकार देखें तथा आपकी कहानी कमेंट में शेयर करें ताकि ओर पाठकों का विश्वास बढें जिससे जो इस दीपावली को यह उपाय नहीं कर पाये वो अगली दीपावली को यह उपाय करें।
 कृपया इस जानकारी को शेयर करके अपने ज्यादा से ज्यादा मित्रों तक आने वाली दीपावली तक पहुंचावें।
 इस ब्लोग के अन्य महत्वपूर्ण ज्योतिष आलेख"-

कन्या तुला व सिंह राशि वालों को साढे साती के दुष्प्रभाव से बचाने के उपाय

Monday, August 22, 2016

लाल किताब के अनुसार सूर्य ग्रह लग्न (खाना नं. 1 में) होने का फलादेश


प्रिय पाठको, 
            नमस्कार यह इस श्रखंला का पांचवा आलोख है यदि आप प्रथम बार इस ब्लोग पर आये है तो लाल किताब से ज्योतिष सीखने के लिए कृपया इसको प्रथम भाग से पढना प्रारंभ करें । पूर्व में प्रकाशित तीन भागों के लिंक नीचे दिये जा रहे हैः-
     इस भाग में हम लग्न में ‘‘सूर्य’’ हो तो क्या फलादेश होता है उस पर प्रकाश डालेगे - 
लग्न में सूर्य वाला  राजा की भांति उच्च अफसर होगा ।(यहाॅ यह जानना रोचक होगा कि मेरे एक मित्र श्री रामस्वरूप पारीक जब सामान्य अध्यापक थे तब लाल किताब के इस फलादेश को सुनकर हसें थे परन्तु आज जब उनकी उम्र लगभग 44 वर्ष है तब उनका प्रिन्सिपल (प्रधानाचार्य) में प्रमोशन हो चुका है तथा अभी 16 वर्ष की नोकरी में वो कहा तक जायेगे कहना मुश्किल है 
अतः लाल किताब के इस कथन को हमेशा याद रखें इसके फलादेश में कोई दोष नही होगा यदि दोष होगा तो आपके गणित या आपकी समझ में होगा अर्थात या तो आपकी जन्म पत्रिका गलत बनी होगी या आपने अर्थ सही समझा नही होगा मान लिजिये आप अफसर नही है तो तो आप ‘‘राजा की भांति’’ तो है तथा आपके अधीनस्थो के लिए ‘‘अफसर’’ भी है या आप आज ऐसे उच्च पद पर नहीं है तो उम्र के आगामी दौर में ऐसे उच्च पद पर जा सकते हैं।
ऐसा व्यक्ति शराब पीने से दूर ही रहता है अर्थात शराबी नही बनता तथा धर्म कर्म में रूचि रखता है प्याउ खुलवाना, धर्मशाला बनवाना, मंदिर बनवाना आदि धार्मिक संस्थाओं व समाज सेवा के कार्यो में खासकर प्याउ, कुआ खुदवाना आदि कार्यो में सहायता देने वाला होता है ।
ऐसा व्यक्ति पिता की आखरी आयु तक सेवा करता है ।
ऐसे जातक को अमूमन उसकी पैतृक सम्पति से धन नहीं मिलता या पिता की सम्पति में  अधिकार से कम हिस्सा मिलता है परन्तु ऐसा जातक उपने पुत्र के लिए धन अवश्य छोड़ता है ।
लग्न में सूर्य वाले जातक का जो बुरा (अहित) करने का प्रयास करता है उसका खुद का ही बुरा हो जाता है ।
ऐसा जातक गरीब की सहायता करने को हरदम तैयार रहता है ।
लग्न में सूर्य वाले के शरीर में सांप जैसा गुस्सा होता है (मतलब छेडने पर सांप जैसे फुकारता है वैसे छेडने पर ऐसा जातक गुस्सा करता है बगैर छेडे नहीं करता)
अपने मेहनत के बल पर स्वयं बना अमीर होगा ।
माता पिता व स्वयं की आयु लम्बी होगी (परन्तु सूर्य नं. 1 व शुक्र 7 होतो पिता की आयु लम्बी होने की शर्त नहीं है )
सरकारी सेवा से या सरकारी स्त्रोतो से धन मिलेगा धन कमाने में सफर भी जादा होगा ।
इमानदारी का धन ऐसे जातक को फलता रहता है व बरकत देता है ।
अपनी आखों पर निश्चय करता है परन्तु कानों पर ऐतबार नहीं करता 
यदि सुर्य पहले स्थान में व शुक्र 7 वे स्थान में हो तो ऐसे जातक के पिता उसके बचपन में ही गुजर सकते है व उसकी स्त्री की सेहत मंदी तथा यदि सूर्य 1 शुक्र 7 नं. वाला जातक दिन में स्त्री सहवास करता हो तो स्त्री को तयेदिक (टी.बी.) हो सकती है ।
सुर्य नं. 1 व मगंल नं. 5 हो तो लड़के पैदा हो होकर मरते रहते है या गंभीर बीमारी से ग्रस्त रहते है कृप्या ध्यान रखे मगंल नं. 5 में हो तो ही ये बिन्दु लागु होगा ।
सुर्य नं. 1 व शनि नं. 8 हो तो स्त्री (पत्नी) बार-2 शादिया करने पर भी मरती रहती है या स्त्री बिमार रहती है (उपाय दिन में सहवास न करें). 
उपर पढे हुए दो बिन्दुओं से घबराए नहीं इनका उपाय है -
1. दिन में स्त्री सहवास न करें ।
2. पैतृक मकान में हैण्डपम्प (बोरवेल) खुदवाए 
3. पुत्र के स्वास्थय का ध्यान रखे व मगंल नं. 5 वालों के लिऐ अलग से जो उपाय बताए जावें (आगामी भागो में) उनका ध्यान रखें ।
अगले भाग में लग्न में ‘‘शुक्र’’ होने पर प्रकाश डाला जायेगा ।
     यह श्रखला आपको कैसी लग रही है तथा जन्म पत्रिका व जीवन से इसका किस हद तक मिलान हो रहा है कृप्या कमेटं में अवशय दर्ज करें ताकि पाठकों को लाल किताब ज्योतिष की सत्यता के बारे में जानकारी मिल सके ।
     आपके कमेटं मुझे अगले भाग को शीध्र तैयार करने के लिये भी प्रोत्साहित करेगें साथ ही आप कमेटं में किस ग्रह से सबंधित फलादेश पहले चाहते हैं वो भी लिखें ।

Tuesday, May 17, 2016

लाल किताब के अनुसार शनि प्रथम भाव (लग्न या खाना न. 1) में होने का फलादेश :लाल किताब की सहायता से स्वयं जानिये अपना भविष्य पार्ट - 4,

प्रिय पाठको, 
            नमस्कार यह इस श्रखंला का चैथा आलोख है यदि आप प्रथम बार इस ब्लोग पर आये है तो लाल किताब से ज्योतिष सीखने के लिए कृपया इसको प्रथम भाग से पढना प्रारंभ करें । पूर्व में प्रकाशित तीन भागों के लिंक नीचे दिये जा रहे हैः-

भाग प्रथमः- लाल किताब से ज्योतिष कैसे सीखें 
भाग द्वितीयः- लग्न में गुरू का फलादेश 
भाग तृतीयः- लग्न में राहु का फलादेश 
     इस भाग में हम लग्न में ‘‘शनि’’ हो तो क्या फलादेश होता है उस पर प्रकाश डालेगे - 
           शनि के प्रथम स्थान में होने का फलादेश थोडा कठिन है इसके लिये आप पहले अपनी जन्म पत्रिका (लग्न पत्रिका) हाथ में ले लेवे उसके अनुसार देखे कि क्या आपकी जन्म पत्रिका मे शनि न. 1 के अलावा निम्न में से कोई स्थिति बन रही है ।
शक्र भी खाना न. 1में शनि के साथ है ।
राहु खाना न. 4 केतु खाना न. 10 में है ।
 बुध या शुक्र न. 7 में है । 
या
 मंगल खाना न. 6 से 12 में कही पर भी है ।
(कौनसे खाने में कौनसा ग्रह है यह देखने के लिए इस आलेख का प्रथम भाग जिसका लिंक उपर दिया है वापस ध्यान से पढ़े)
यदि उपर लिखी चार स्थितियों में से एक भी स्थिति बन रही है तो आप भाग्य शाली हैं क्यो कि ऐसी स्थिति में आपका धन व दौलत लगातार बढता रहेगा (मैं क्षमा चाहता हु पर लाल किताब में लिखा है ज्यादातर ऐसी कुण्डली वाले के धन दौलत बढने का कारण बेईमानी, मक्कारी होती है क्यों कि ‘‘पापी का धर्म माया इक्ट्टा करना’’ ऐसा लाल किताब में लिखा है) यदि आपकी कुण्डली में प्रथम खाने में शनि है व उपर दी गयी चार स्थितियों में से कोई भी स्थिति नही बन रही है तो आप निर्धन हो सकते हैं। 
लाल किताब बहुत वैज्ञानिक है इसमें शनि खाना न. 1 वाले के निर्धन होने की पहचान बताई गई है ‘‘जिस्म पर हद से ज्यादा बान हो तो निर्धन होने की पहचान होगी’’ यदि ऐसी संतान (शनि न. 1 में हो व उपर बतायी 4 स्थितियों में से कोई नही बन रही हो) किसी माता-पिता के जन्म लेती है तो संतान के 18 वर्ष की आयु का होने तक माता-पिता की सारी पैतृक सम्पति बिक जाती है अर्थात ऐसी संतान के जन्म के समय माता-पिता बहुत दौलतमंद व खुशी के बाजे बजा रहे होते है परन्तु जैसे-2 संतान की आयु बढती है वैसे-2 उनका पैतृक धन खजाना घटता जाता है व ऐसी संतान के 18 वर्ष की आयु का होने तक एकदम शुन्य हो जाता है ।
(शनि न. 1 व उपर के 4 योग में से कोई नहीं)
लाल किताब की वैज्ञानिकता का एक ओर प्रमाण आप जाॅच सकते है यदि शनि खाना न. 1 में व बुध खाना न. 7 में हो तो ऐसी संतान के जन्म के बाद जन्म लेने वाली संतान लडका (भाई) ही होगी ऐसा लाल किताब कहती है यदि आपकी कुण्डली में ऐसा योग है तो जाॅच करें कि क्या यह सही है कि आपके छोटे भाई तो है पर छोटी बहन नही है व आपके माता-पिता आपके जन्म के समय धनवान थे।
- ज्यादातर ऐसे टेवे वाले की पढाई अधुरी रहती है तथा वो विधा अध्यन में बहुत होशियार नहीं होता ।
- ऐसी जन्म पत्रिका वाला मांगलिक भी हो तो चोर, फरेबी, बेईमान, झगड़ालु,    धोखेबाज हो सकजा है।
- शनि नं. 1 सूर्य नं. 7 में हो तो सरकारी सेवा या सरकारी खजाने से धन प्राप्त नही होता है व यदि होता है तो सेवा बीच में छुट सकती है या धन की वसूली हो सकतीहै या ऐसा धन बरबाद हो सकता है ।
- ऐसे व्यक्ति की 36 से 48 वर्ष की आयु का समय का भी बुरा व्यतित होता है इसमें धन हानी के साथ-2 बीमारीया भी घेर लेती है खासकर के ऐसा तब होता है जब वो इस उम्र में मकान बनवाए विशेषकर ऐसा मकान जिसका दरवाजा पश्चिम में हो शराब का सेवन करे व परायी स्त्रीयों में अवैध सबंध बनावे ।
अब उपाय बताते है -

(1) धन की कमी, निर्धनता के लिए ऐसी जन्म पत्रिका वाला जातक सूर्य का उपाय  करे अर्थात सुर्य को अध्र्य देवे, बदंरो को चने खिलावे, आदित्य हद्वय स्त्रोत का पाढ करे गायत्री मत्रं का जाप करे तो उसकी धन की कमी दुर होगी ।
(2) 36 से 48 वर्ष का आयु में खासकर पश्चिम दिशा में खुलने वाला मकान न बनाए, शराब मासं, व्याभिचार से पूर्णत दूर ही रहे ।
(3) विद्या में रूकावट, बीमारी व दुख आए तब जमीन में सूरमा दबावे, बड़ (बरगद)  के जड़ की मिट्टी को दूध में मिलाकर रोज तिलक लगावे तो सहायता मिलती है।

आगामी आलेख में ‘‘लग्न में सूर्य ग्रह’’ पर प्रकाश डाला जावेगा उससे अगले में ‘‘लग्न में शुक्र ग्रह’’ पर प्रकाश डाला जावेगा आपकी लग्न में जो ग्रह हो उसे कमेटं में लिखे ताकि उस पर भी प्रकाश डाला जा सके । 

Featured Post

भूत देखने के लिये प्रयोग

आप भूत प्रेत नहीं मानते हो तों एक सरल सा प्रयोग मैं आपको बता देता हूं ताकि आप भूत जी के दर्शनों का लाभ उठा सकें यह प्रयोग मुझे एक तांत्रिक ...

Google+ Followers